भाई कमलानंद ने गृह मंत्री को लिखा खुला पत्र, कैदियों के सुधार के लिए की यह अपील

सेवा में,

श्रीमान अमित शाह जी,

माननीय गृह मंत्री

भारत सरकार।

मननीय गृह मंत्री जी सादर प्रणाम, मैं भाई कमलानंद (डा. कमल टावरी) पूर्व सचिव भारत सरकार और कुलपति पंचगव्य विद्यापीठम लगभग 80 साल का हो गया हूं।

मैं पूरे भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व का ही समय-समय पर भ्रमण करता रहता हूं। हम लोग बिना किसी सरकारी मदद के समाज कैसे समृद्ध हो, सभी स्वस्थ और आनंदित हो एवं अधूरे सपने पूरे करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

  1. मेरा आपसे अनुरोध है कि पूरे भारत में जो जेल हैं, उनमें कैदी होते हैं। इन जेलों के कैदी, जेलर और पुलिस की मानसिकता दूषित हो गई है। कैदियों में सुधार लाने के लिए उन्हें गाय आधारित खेती से जोड़ा जाए। जिससे कैदियों की जिंदगी में बदलाव लाया जा सके और वह एक अच्छा और सामाजिक व्यक्ति बनकर अच्छे समाज का हिस्सा बन सके। इससे कैदियों को सकारात्मक कार्यों में लगाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।
  2. जेलों में जहां-जहां पर खेती हो सकती है, वहां पर अगर गाय पर आधारित खेती की जाए तो एक ओर कैदियों की मानसिकता सुधरेगी और दूसरी ओर कैदियों को नई सोच पैदा होगी।
  3. हमारे चाचा झूमर लाल टावरी जी ने करीब 30 साल पहले दुर्ग में रूकमणी गौशाला खोली थी। वहां के जेलर ने मुझे बताया कि उससे कैदियों का मानसिक सुधार होने के साथ ही उनको नया स्किल मिला। क्योंकि गौशाला में गायों की देखभाल करने से कैदियों के भीतर मानवता, इंसानियत, सहनसीलता की भावना उत्पन्न हुई।
  4. जेल के प्रशासनिक अधिकारियों के साथ हम पंचगव्य विद्यापीठम का सहमति पत्र बना सकते हैं। इसके साथ ही हम लोग देश की सभी राज्यों की जेलों में चाहते हैं कि जहां-जहां भूमि की उपलब्धता है वहां पर देशी गाय के माध्यम से खेती करवाई जाए। वहां पर देशी गाय के साथ अन्य खाद, पंचगव्य के उत्पाद तैयार कवाए जाएं। इसके माध्यम से स्वरोजगार के अवसर भी प्रदान किए जा सकते हैं। मैं पूर्व में उत्तर प्रदेश में खादी ग्रामोद्योग में भी रह चुका हूं। इससे एक बहुत बड़ी कांति होगी.
  5. इसके लिए सभी राज्यों की जेलों को पत्र भेजा जा सकता है। इसके लिए अलग से बजट की भी जरूरत नहीं है। हम पंचगव्य विद्यापीठम के माध्यम से इस योजना को फॉलोअप दे सकते हैं। हमारे साथ गव्यसिद्धों और गौशालाओं का फेडरेशन है। हम इन सबके माध्यम से इन जेलों में एक नई कांति ला सकते हैं। इससे गाय भी बचेगी। देशी गाय के माध्यम से नई सोच, नए विकास की दिशा में उद्यमिता भी बढ़ेगा।
  6. आज के समय में ग्लोबलाइजेशन खतरे में आ गया है। इसके लिए अब हमें लोकलाइजेशन पर जोर देना होगा। ग्राम स्वराज, स्वावलंबन, अधूरे सपने, अंत्योदय आदि कई शब्दों ऐसे हैं, इनको लेकर एकात्मवाद पूरा करना होगा।
  7. मेरा अनुरोध है कि गृह मंत्रालय के माध्यम से पूरे राज्यों की जेलों में कैदियों से देशी गाय आधारित खेती करवाए जाने से नई आशा, चेतना, उत्साह, उमंग, स्फूर्ति और स्वावलंबन की दिशा में जेल में नया काम हो सकता है। इससे कैदियों को एक नई सोच, विकल्प, नई मानसिकता, हुनर और उनका खानपान भी अच्छा होगा। जेल से बाहर आने पर वह अच्छे नागरिक बनेंगे। मेरा अनुरोध है कि इस पर आप एक्शन लें।
  8. पुलिस के ट्रेनिंग सेंटरों में इस विषय पर कार्यशाला और रिसर्च करवाएं।

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