पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष पंचमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़, आज है कौमार षष्ठी और सोमवार व्रत
आज पंचमी तिथि 09:24 AM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र मघा 07:20 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी | सिद्धि योग 05:20 PM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण बालव 09:24 AM तक, बाद कौलव 09:47 PM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 07:29 AM – 09:09 AM है | आज चन्द्रमा सिंह राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – आषाढ़
- अमांत – आषाढ़
तिथि
- शुक्ल पक्ष पंचमी – Jun 29 09:14 AM – Jun 30 09:24 AM
- शुक्ल पक्ष षष्ठी – Jun 30 09:24 AM – Jul 01 10:20 AM
नक्षत्र
- मघा – Jun 29 06:34 AM – Jun 30 07:20 AM
- पूर्व फाल्गुनी – Jun 30 07:20 AM – Jul 01 08:53 AM
हमारे शास्त्रों में लिखा है, सिद्ध पुरुष प्रलय काल में भी विचलित नहीं होते हैं। यानी दुनिया उलट-पुलट हो जाए, विपरीत की पराकाष्ठा आ जाए, और तब भी आप सहज और सामान्य बने रहें। मेडिकल की दुनिया में एक शब्द चलता है- एसएडी यानी सीजनल इफेक्टिव डिसऑर्डर।
कई लोग इससे पीड़ित हैं। एक मौसम हमारे भीतर भी होता है। जब हम सर्दी से गर्मी, गर्मी से बारिश और बारिश से सर्दी के मौसम में प्रवेश कर रहे होते हैं, तो मौसम केवल आसमान पर नहीं बदलता, हमारे शरीर, हमारी मानसिकता में भी बदलता है।
कई बार तो लोगों पर इस संधिकाल में बेचैनी और उदासी हावी हो जाती है। और मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ये लक्षण ज्यादा होते हैं। मौसम परिवर्तन से महिलाओं की पारिवारिक दिनचर्या भी प्रभावित होती है।
इसलिए माताओं-बहनों को चाहिए कि जब भी मौसम बदले, वे अपने भीतर खूब संतुलन पैदा करें। अभी तो हमारे जीवन में इतना असंतुलन है कि मौसम इतना गर्म नहीं था, जितनी ठंडक हम अपने भीतर पैदा कर लेते हैं। असंतुलन से बचिए। अपने भीतर संतुलन लाइए।