चैत्र नवरात्रि की अष्टमी तिथि आज: शिव जी से मिला था देवी पार्वती को गौरी नाम, अष्टमी पर होती है महागौरी की पूजा

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज शनिवार को नवरात्रि की अष्टमी तिथि है। चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की उपासना व विधि पूर्वक पूजन किए जाने का विधान है। महागौरी को भगवान गणेश की माता के रूप में भी जाना जाता है। इसलिए माना जाता है कि अष्टमी तिथि पर महागौरी को प्रसन्न करने से भगवान शिव सहित गणेश जी और देव कार्तिकेय भी प्रसन्न हो जाते हैं। इस दिन हवन और कन्या पूजन करने का भी विधान है।

महागौरी की पूजा का फल

महागौरी की पूजा को लेकर मान्यता है कि जिनकी कुंडली में विवाह संबंधित परेशानियां हों उनको अष्टमी पर मां महागौरी की उपासना करने से शुभ फल मिलता है। पौराणिक कथा भी है कि महागौरी ने स्वयं तप करके भगवान शिवजी जैसा वर प्राप्त किया था। यदि किसी के विवाह में विलंब हो रहा हो तो वह भगवती महागौरी की साधना करें, तो उनका विवाह मनोरथ पूर्ण होने की मान्यता है।

इस मंत्र से करें देवी की पूजा

या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥

अर्थ: हे मां! सर्वत्र विराजमान और मां गौरी के रूप में प्रसिद्ध अंबे मां, आपको मेरा बार-बार प्रणाम है। हे मां, मुझे सुख-समृद्धि प्रदान करो।

पार्वती जी ने की थी जब घोर तपस्या

पूर्व जन्म में मां ने पार्वती रूप में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी तथा शिव जी उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न हुए और इसके बाद पार्वती जी ने भोलेनाथ को पति स्वरूप में प्राप्त किया था। शिव जी की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करते हुए मां का शरीर धूल-मिट्टी और मौसम के प्रभाव से मलिन हो गया था। जब शिवजी ने गंगाजल से इनके शरीर को स्वच्छ किया तब उनका शरीर गौर व दैदीप्यमान हो गया। तब ये देवी महागौरी के नाम से विख्यात हुईं।

ऐसा है मां गौरी का स्वरूप

मां के आठवें स्वरूप महागौरी की 4 भुजाएं हैं। उनके एक हाथ में त्रिशूल है। दूसरा हाथ अभय मुद्रा में हैं। तीसरे हाथ में डमरू सुशोभित है और चौथा वर मुद्रा में है। मां का वाहन वृष है। साथ ही उनका रंग एकदम सफेद है।

कैलेंडर

तिथिअष्टमी सायं 07:26 बजे तक
नक्षत्रपुनर्वसु प्रातः 05:32 बजे तक, अप्रैल 06
नवमी
पुष्य
योगअतिगंडा 08:03 PM तक
करणविष्टि 07:44 AM तक
कर्मा
बावा 07:26 PM तक
काम करने के दिनशनिवार
बलावा
पक्षशुक्ल पक्ष

चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर

विक्रम संवत2082 कलायुक्त
संवत्सरकालायुक्त 03:07 अपराह्न, 25 अप्रैल 2025 तक
शक संवत1947 विश्वावसु
सिद्धार्थ
गुजराती संवत2081 नाला
चन्द्रमासाचैत्र – पूर्णिमांत
दायाँ/गेट23
चैत्र – अमंता

राशि और नक्षत्र

राशिमिथुन रात्रि 11:25 बजे तक
नक्षत्र पदपुनर्वसु 11:19 AM तक
करका
पुनर्वसु 05:21 PM तक
सूर्य राशिमीना
पुनर्वसु रात्रि 11:25 बजे तक
सूर्य नक्षत्ररेवती
पुनर्वसु प्रातः 05:32 बजे तक, अप्रैल 06
सूर्य पदरेवती
पुष्य

रितु और अयाना

द्रिक ऋतुवसंत (वसंत)
दिनामना12 घंटे 30 मिनट 48 सेकंड
वैदिक अनुष्ठानवसंत (वसंत)
रात्रिमना11 घंटे 28 मिनट 10 सेकंड
ड्रिक अयानाउत्तरायण
मध्य12:01 अपराह्न
वैदिक अयनउत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त04:13 पूर्वाह्न से 04:59 पूर्वाह्न तक
प्रातः संध्या04:36 पूर्वाह्न से 05:45 पूर्वाह्न तक
अभिजीत11:36 पूर्वाह्न से 12:26 अपराह्न तक
विजया मुहूर्त02:06 अपराह्न से 02:56 अपराह्न तक
गोधूलि मुहूर्त06:15 अपराह्न से 06:38 अपराह्न तक

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