चंबा (टिहरी): अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व दीपावली की सही तिथि को लेकर लोगों में असमंजस है. दरअसल, कार्तिक अमावस्या 20 अक्टूबर और 21 अक्टूबर दो दिन प्रदोष व्यापिनी होने से दीपावली महालक्ष्मी पूजन के लिए संशय बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, पुरुषार्थ-चिंतामणि, तिथि निर्णय आदि ग्रंथों में दिये गये शास्त्र वचनों के अनुसार दूसरे दिन 21को ही प्रदोष व्यापिनी अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजन करना श्रेष्ठकर रहेगा.
दीपावली सतयुग में समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुईं माता महालक्ष्मी के स्वागत के रूप में मनाई गई थी। त्रेतायुग में मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम द्वारा रावण वध के बाद अयोध्या आगमन पर पूरी नगरी को दीपमालिकाओं से सजाया गया था और यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय के प्रतीक दीपपर्व-प्रकाशपर्व के रूप में मनाया गया था। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा नरकासुर के वध और अपनी बहन सत्यभामा के लिए पारिजात का वृक्ष लाने की घटना दीपावली पर्व के एक दिन पूर्व चतुर्दशी से जुड़ी है गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी कार्तिक अमावस्या दो दिन प्रदोष व्यापिनी होने से दीपावली महालक्ष्मी पूजन में संशय है। अमावस्या 20 अक्टूबर अपराह्न 3 बजकर 45 मिनट से प्रारम्भ होकर 21 अक्टूबर को सायं 5.55 तक व्याप्त रहेगी। अतः स्पष्ट है कि 21 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या तिथि की व्याप्ति कम समय के लिए है लेकिन फिर भी शास्त्र निर्देशानुसार दो दिन प्रदोष व्यापिनी अमावस्या होने पर अगले दिन ही महालक्ष्मी पूजन पर्व मनाया जाना चाहिए। अगर प्रथम दिन ही प्रदोष व्यापिनी अमावस्या हो परन्तु दूसरे दिन अमावस्या साढ़े तीन प्रहर से अधिक हो एवं प्रतिपदा वृद्धि गामिनी हो तो प्रथम दिन प्रदोष व्यापिनी अमावस्या छोड़कर भी दूसरे दिन ही पूजन करना चाहिए।
इस नियमानुसार अर्थात् द्वितीय दिन अमावस्या साढ़े तीन प्रहर से अधिक है एवं प्रतिपदा वृद्धिगामिनी है इसलिए चतुर्दशी तिथि वाले दिन प्रदोष व्यापिनी अमावस्या को छोड़कर अगले दिन अमावस्या मंगलवार 21 को
दीपावली पर्व मान्य रहेगा।
ज्योतिषाचार्य हर्षमणि बहुगुणा और ज्योतिषाचार्य उदय शंकर भट्ट का कहना है कि
निर्णय सिंधु, धर्म सिंधु, पुरुषार्थ-चिंतामणि, तिथि निर्णय आदि ग्रंथों में दिये गये शास्त्र वचनों के अनुसार दूसरे दिन ही प्रदोष व्यापिनी अमावस्या के दिन लक्ष्मी पूजन युक्ति संगत होगा। अतः 21 अक्टूबर मंगलवार को व्याप्त प्रदोष काल अर्थात् सूर्यास्त से आधा घण्टा पहले से सूर्यास्त के बाद लगभग 2 घंटा 24 मिनट की अवधि में निःसन्देह लक्ष्मी पूजन शुभ होगा