आज का पंचांग : तृष्णा से बचें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का भगवद् चिन्तन
तृष्णा से बचें

जब जीवन आवश्यकताओं की बजाय इच्छाओं के अनुरूप जिया जाने लगे बस इसी का नाम तृष्णा है। शास्त्रों ने कहा कि “तृष्णैका तरुणायते” अर्थात शरीर वृद्ध हो जाता है पर तृष्णा कभी वृद्ध नहीं होती, वह सदैव तरुणी बनी रहती है। संसार नित्य परिवर्तनशील है, लेकिन इस नित्य परिवर्तित संसार में भी तृष्णा कभी वृद्धा नहीं होती, वह सदैव जवान बनी रहती है और इसका कभी नाश भी नहीं होता है।

तृष्णा रूपी अग्नि की लपटें प्रतिपल मनुष्य को जलाती रहती हैं। तृष्णा को मिटाना स्वयं के वश में नहीं पर प्रभु शरणागत हो जाने पर इसका प्रभाव स्वतः कम होने लगता है। महापुरुषों ने बताया कि आवश्यकताओं को तो पूरा किया जा सकता है, लेकिन इच्छाओं को पूरा करना कभी भी संभव नहीं। हमें स्वयं के बल का नहीं, प्रभु के बल का विश्वास होना चाहिए। प्रभु कृपा का बल ही मन को तृष्णा से हटाकर श्रीकृष्ण चरणों में लगा देता है।

आज का विचार

भाग्य बारिश के पानी के सामान होता है, और परिश्रम कुएँ के जल के सामान होता है। मनुष्य के जीवन में बंधन हमेशा दुःख देता हैं। और संबंध हमेशा सुख देता हैं.!

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