सुप्रभातम्: क्या पैकेजिंग पर देवताओं की छवियों का उपयोग करना सही है?

कई बार लोग किसी चीज की नई शुरुआत करते हैं, तो वहाँ भगवान् गणेश या किसी अन्य भगवान् की तस्वीर लगा लेते हैं। वहीं, अक्सर कार्ड, बैग, कपड़े इत्यादि में भी भगवान की फोटो लगा देते हैं। कई लोग तो लोगों को भावनात्मक रूप से जोड़ने के लिए पैकेजिंग पर भी भगवान् की तस्वीर प्रिंट कर लेते हैं, लेकिन क्या ऐसा करना सही है?

हिमशिखर धर्म डेस्क

कहा जाता है कि अगर आस्था है, तो आपको पत्थर में भी भगवान् दिख जाते हैं और अगर नहीं तो आपको भगवान् की मूर्ति में भी भगवान नहीं दिखते। कुछ इसी तरह से भगवान की तस्वीरों का अन्य जगह पर छपने का है। कई लोग भगवान् के प्रति बहुत अधिक भक्ति दिखाने के चक्कर में उनकी तस्वीर कुछ ऐसी जगहों पर इस्तेमाल कर लेते हैं, जहां पवित्रता का ह्रास होता है। कार्ड, बैग, डिब्बों जैसी वस्तुओं पर भगवान की तस्वीर छापना उचित नहीं माना जाता क्योंकि ये वस्तुएँ बाद में ज़मीन पर गिर जाती हैं, फेंकी जाती हैं या अपवित्र स्थानों पर पहुँच जाती हैं। इससे अनजाने में भगवान की छवि का अनादर होता है।

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भगवान् में अगर किसी की आस्था है, तो भगवान की तस्वीर हर जगह साथ लेकर चलने की आवश्यकता नहीं होती। अगर किसी की आस्था सुदृढ़ हो, तो वो भगवान् की तस्वीर का प्रयोग किसी अन्य लाभ के लिए बिलकुल नहीं करेगा। लेकिन आजकल हम लोग कई ऐसी जगहों पर भगवान् की तस्वीर का इस्तेमाल किया हुआ देख लेते हैं, जो नहीं होना चाहिए। ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए, चलिए इसके कुछ मुख्य कारण समझने का प्रयास करते हैं…सजावट या व्यावसायिक लाभ के लिए भगवान् की तस्वीर का प्रयोग कितना सही?

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जानकारों का भी मानना है कि भगवान की छवि केवल एक चित्र नहीं, बल्कि एक दिव्य ऊर्जा प्रतीक मानी जाती है। इसलिए ऐसी वस्तुओं पर भगवान के चित्र नहीं लगाने चाहिए, जो फर्श, पैरों, या धूल के संपर्क में आएँ या फिर जो कूड़े या गंदगी में फेंकी जाए, जैसे कि कार्ड, रैपर, कैलेंडर आदि। देवताओं की छवि का उद्देश्य पूजन, ध्यान और श्रद्धा है, न कि सजावट या व्यापारिक उपयोग। इसलिए, धार्मिक चित्रों का प्रयोग केवल पूजा, फ्रेम या डिजिटल वॉलपेपर तक सीमित रखें। यदि उपहार या कार्ड में भगवान की छवि हो, तो उसे बाद में सुरक्षित या आदरपूर्वक जलाकर विसर्जित करें। बैग, डिब्बे, या पैकेजिंग में भगवान की छवि लगाने से बचें। देवी देवताओं के चित्र वाले रैपर और पैकेट को लोग इधर उधर फेंक देते हैं। ऐसे में यह उचित नहीं प्रतीत होता है. यदि धार्मिक प्रतीक का प्रयोग करना ही हो, तो मंगल कलश, दीपक जैसे चिह्नों का उपयोग करें। भगवान की तस्वीरें केवल पूजा स्थल, घर के मंदिर या धार्मिक ग्रंथों में ही रखें।

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