पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज का भगवद् चिंतन
चिंतनशील बनें
जीवन में केवल चिंता करने मात्र से कठिनाइयाँ हल नहीं हो जाती हैं। चिंता हमारे चिंतन की क्षमता को अवरुद्ध कर देती है और यही अवरोध तो हमारे जीवन में दुःखों का मूल कारण भी बन जाता है। चिंता करने मात्र से किसी समस्या का समाधान तो नहीं हो पाता लेकिन मन की शांति अवश्य भंग हो जाती है। चिंताग्रस्त मस्तिष्क गेहूँ में घुन लगे उस दाने के समान होता है, जो बाहर से साबुत दिखते हुए भी अंदर से खोखला हो जाता है। चिंतन मुक्त व्यक्ति एक बार नहीं आजीवन चिंता की अग्नि में जलता रहता है।
किसी भी समस्या के आ जाने पर उसके समाधान के लिए विवेकपूर्ण निर्णय, सद् चिंतन हमें प्रदान करता है। चिंतनशील व्यक्ति के लिए कोई न कोई मार्ग अवश्य मिल ही जाता है। जिसके पास विवेक है, वह समस्या के आगे से हटता नहीं अपितु डटता है। जीवन में किसी भी समस्या का डटकर मुकाबला करना आधी सफलता प्राप्त कर लेना भी है। जीवन में विवेक की चाबी से समस्या के ताले अवश्य खुल जाते हैं।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 06:41 ए एम | सूर्यास्त | 06:41 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 05:35 ए एम, मार्च 17 | चन्द्रास्त | 04:02 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | द्वादशी – 09:40 ए एम तक | नक्षत्र | धनिष्ठा – 06:22 ए एम, मार्च 17 तक |
|---|---|---|---|
| त्रयोदशी | शतभिषा | ||
| योग | शिव – 09:37 ए एम तक | करण | तैतिल – 09:40 ए एम तक |
| सिद्ध | गर – 09:37 पी एम तक | ||
| वार | सोमवार | वणिज | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 2 | फाल्गुन – अमान्त | |
| राजा | सूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | शनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | सूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | चन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | बुध – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | सूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | मंगल – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | बुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | शनि – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मकर – 06:14 पी एम तक | नक्षत्र पद | धनिष्ठा – 12:06 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| कुम्भ | धनिष्ठा – 06:14 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | मीन | धनिष्ठा – 12:19 ए एम, मार्च 17 तक | |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद | धनिष्ठा – 06:22 ए एम, मार्च 17 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद | शतभिषा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 12 घण्टे 00 मिनट्स 13 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 11 घण्टे 58 मिनट्स 39 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:41 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:05 ए एम से 05:53 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:29 ए एम से 06:41 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:17 पी एम से 01:05 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:29 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:39 पी एम से 07:03 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:41 पी एम से 07:53 पी एम |
| अमृत काल | 07:47 पी एम से 09:24 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:16 ए एम, मार्च 17 से 01:04 ए एम, मार्च 17 |