आज का पंचांग : नवरात्रों की मंगल बधाई

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

*स्थापना समय चक्र*
चैत्रशुक्ल प्रतिपदा, 19 मार्च (गुरूवार) को प्रातः 06:54 से अंतरात्रि 04:52 तक है। शास्त्रनुसार बसन्त नवरात्र का प्रारम्भ व घटस्थापना इसी दिन होगी। घटस्थापना हेतु द्विस्वभाव मीन लग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक एवं मिथुन लग्न प्रातः 11:24 से दोपहर 01:38 तक है। शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05, चर लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 11:04 से दोपहर 03:32 तक एवं *अभिजित मुहूर्त दोपहर* 12:11 से 12:59 तक रहेगा।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:37 ए एमसूर्यास्त06:43 पी एम
चन्द्रोदय06:39 ए एमचन्द्रास्त07:05 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिअमावस्या – 06:52 ए एम तकनक्षत्रउत्तर भाद्रपद – 04:05 ए एम, मार्च 20 तक
प्रतिपदा – 04:52 ए एम, मार्च 20 तकरेवती
द्वितीयाकरणनाग – 06:52 ए एम तक
योगशुक्ल – 01:17 ए एम, मार्च 20 तककिंस्तुघ्न – 05:55 पी एम तक
ब्रह्मबव – 04:52 ए एम, मार्च 20 तक
वारगुरुवारबालव
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते5फाल्गुन – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमीननक्षत्र पदउत्तर भाद्रपद – 11:04 ए एम तक
सूर्य राशिमीनउत्तर भाद्रपद – 04:46 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रउत्तर भाद्रपदउत्तर भाद्रपद – 10:26 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदउत्तर भाद्रपदउत्तर भाद्रपद – 04:05 ए एम, मार्च 20 तक
  रेवती
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 05 मिनट्स 11 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान11 घण्टे 53 मिनट्स 40 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:40 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:02 ए एम से 05:50 ए एमप्रातः सन्ध्या05:26 ए एम से 06:37 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:16 पी एम से 01:04 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:40 पी एम से 07:04 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:43 पी एम से 07:54 पी एम
अमृत काल11:32 पी एम से 01:03 ए एम, मार्च 20निशिता मुहूर्त12:16 ए एम, मार्च 20 से 01:03 ए एम, मार्च 20
सर्वार्थ सिद्धि योग04:05 ए एम, मार्च 20 से 06:36 ए एम, मार्च 20

नवरात्रों की मंगल बधाई

नैराश्य रूपी अंधकार का नाश करते हुए सकारात्मकता रूपी नव ऊर्जा से भरकर जीवन को नवीनता प्रदान करना ही नवरात्रि पर्व का मुख्य संदेश है। जीवन में काम, क्रोध, लोभ, मोह का समावेश ही घनघोर रात्रि के समान है जिसमें प्रायः जीव उचित मार्ग के अभाव में भटकता रहता है।

हमारे शास्त्रों में अज्ञान और विकारों को एक विकराल रात्रि के समान ही बताया गया है। इन दुर्गुण रूपी रात्रि के समन के लिए व जीवन को एक नईं दिशा, नईं उमंग, नया उत्साह देने के साधना काल का नाम ही नवरात्र है। माँ दुर्गा साक्षात ज्ञान का ही स्वरूप है और नवरात्र में माँ दुर्गा की उपासना का अर्थ ही ज्ञान रूपी दीप का प्रज्ज्वलन कर जीवन से अज्ञान के तिमिर का नाश करना है।

नवरात्र प्रथम दिवस में माँ शैलपुत्री की आराधना करते हुए नारी के शक्ति स्वरूप का बोध कराते हुए उन्हें देवी स्वरूप में प्रतिष्ठित कराने के पावन पर्व चैत्र नवरात्रि की आप सभी को अनंत शुभकामनाएं एवं मंगल बधाई।

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