आज का पंचांग : माँ ब्रह्मचारिणी नमोऽस्‍तुते

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का विचार

दूसरों के व्यवहार को अपने मन की शांति नष्ट करने का अधिकार नही देना चाहिए, नुकसान हमारा ही है।

आज का भगवद् चिन्तन
माँ ब्रह्मचारिणी नमोऽस्‍तुते

नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। जीवनदायिनी शक्ति की पूजा का पर्व ही नवरात्रि है। शक्ति ही जीवन और जगत का आधार है। शक्ति के बिना जीवन अधूरा और निष्प्राण हो जाता है। नवरात्रि का दूसरा दिवस माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। ब्रह्मचारिणी अर्थात ब्रह्म को भी चारण अर्थात् अनुशासित करने वाली शक्ति। ब्रह्म चारिणी का दूसरा अर्थ है, जो ब्रह्म में ही विचरण करे जो स्वयं ही ब्रह्म स्वरुप हो जाए।

माँ ब्रह्मचारिणी अति सौम्य, सरल, सदा प्रसन्न रहने वाली और कभी भी क्रोध न करने वाली देवी हैं।जिस जीवन में विनम्रता, सहजता और पवित्रता होगी, वहाँ ब्रह्म स्वयं आते हैं। क्रोध जीवन की ऊर्जा का ह्रास करता है। क्रोध भय, अशांति व विषाद देता है। क्रोध से अपने लोग भी एक दिन पराये हो जाते हैं। परम शांति स्वरूपा होने के कारण ही देवी ब्रह्मचारिणी शक्ति संपन्न होकर सबको नियंत्रित कर रही हैं।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:36 ए एमसूर्यास्त06:43 पी एम
चन्द्रोदय07:12 ए एमचन्द्रास्त08:09 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिद्वितीया – 02:30 ए एम, मार्च 21 तकनक्षत्ररेवती – 02:27 ए एम, मार्च 21 तक
तृतीयाअश्विनी
योगब्रह्म – 10:15 पी एम तककरणबालव – 03:43 पी एम तक
इन्द्रकौलव – 02:30 ए एम, मार्च 21 तक
वारशुक्रवारतैतिल
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते6चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमीन – 02:27 ए एम, मार्च 21 तकनक्षत्र पदरेवती – 09:42 ए एम तक
मेषरेवती – 03:18 पी एम तक
सूर्य राशिमीनरेवती – 08:53 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रउत्तर भाद्रपदरेवती – 02:27 ए एम, मार्च 21 तक
सूर्य नक्षत्र पदउत्तर भाद्रपदअश्विनी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 06 मिनट्स 51 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 52 मिनट्स 01 सेकण्ड
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:40 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:01 ए एम से 05:49 ए एमप्रातः सन्ध्या05:25 ए एम से 06:36 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:16 पी एम से 01:04 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:41 पी एम से 07:05 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:43 पी एम से 07:54 पी एम
अमृत काल12:13 ए एम, मार्च 21 से 01:43 ए एम, मार्च 21निशिता मुहूर्त12:15 ए एम, मार्च 21 से 01:03 ए एम, मार्च 21
सर्वार्थ सिद्धि योगपूरे दिनअमृत सिद्धि योग06:36 ए एम से 02:27 ए एम, मार्च 21

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