आज का पंचांग : रुकना नहीं, झुकना नहीं

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आज का भगवद् चिंतन
रुकना नहीं, झुकना नहीं

परिस्थितियों के आगे झुक जाना, लक्ष्य तक पहुँचने से पहले रुक जाना ही है। इस सृष्टि में श्रेष्ठ की प्राप्ति उसी को होगी जिसने कठिन परिस्थितियों का सामना करना स्वीकार किया, झुकना नहीं। नीति शास्त्र कहते हैं, कि अधम श्रेणी के मनुष्य- कठिनाइयों के भय से किसी उत्तम कार्य को प्रारंभ ही नहीं करते। मध्यम श्रेणी के मनुष्य- कार्य को तो प्रारंभ करते हैं पर विघ्नों को आते देख घबराकर बीच में ही छोड़ देते हैं।

उत्तम श्रेणी के मनुष्य- विघ्न बाधाओं से बार- बार प्रताड़ित होने पर भी प्रारंभ किये हुए उत्तम कार्य को तब तक नहीं छोड़ते, जब तक कि वह पूर्ण न हो जाए। कार्य जितना श्रेष्ठ होगा बाधाएं भी उतनी ही बड़ी होंगी। आत्मबल जितना ऊँचा होगा फिर सारी समस्याएं स्वतः उतनी ही छोटी नजर आने लगेंगी। अपने संकल्प को इतना मजबूत बनाइये कि हार को भी आपसे हार कर जाना पड़े। रुकना नहीं, झुकना नहीं सदैव आगे बढ़ना सीखें।

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय06:13 ए एमसूर्यास्त06:54 पी एम
चन्द्रोदय02:19 ए एम, अप्रैल 11चन्द्रास्त11:49 ए एम
पञ्चाङ्ग
तिथिअष्टमी – 11:15 पी एम तकनक्षत्रपूर्वाषाढा – 11:28 ए एम तक
नवमीउत्तराषाढा
योगशिव – 06:31 पी एम तककरणबालव – 10:21 ए एम तक
सिद्धकौलव – 11:15 पी एम तक
वारशुक्रवारतैतिल
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 सिद्धार्थीबृहस्पति संवत्सरसिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासवैशाख – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते27चैत्र – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिधनु – 06:04 पी एम तकनक्षत्र पदपूर्वाषाढा – 11:28 ए एम तक
मकरउत्तराषाढा – 06:04 पी एम तक
सूर्य राशिमीनउत्तराषाढा – 12:38 ए एम, अप्रैल 11 तक
सूर्य नक्षत्ररेवतीउत्तराषाढा
सूर्य नक्षत्र पदरेवती – 12:05 ए एम, अप्रैल 11 तक  
रेवती  
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान12 घण्टे 41 मिनट्स 14 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुवसन्तरात्रिमान11 घण्टे 17 मिनट्स 41 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:34 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:42 ए एम से 05:28 ए एमप्रातः सन्ध्या05:05 ए एम से 06:13 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:08 पी एम से 12:59 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:53 पी एम से 07:16 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:54 पी एम से 08:02 पी एम
  निशिता मुहूर्त12:11 ए एम, अप्रैल 11 से 12:56 ए एम, अप्रैल 11

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