पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज का विचार
हजारों दीयों को एक ही दिए से, बिना उसका प्रकाश कम किए जलाया जा सकता है खुशी बांटने से खुशी कभी कम नहीं होती। उम्मीदों से बंधा एक जिद्दी परिंदा है इंसान जो घायल भी उम्मीदों से है और जिंदा भी उम्मीदों पर है.!
आज का भगवद् चिन्तन
आनंद से जियें
आपका चिंतन ही आपको सुखी बनाता है और आपका चिंतन ही आपके जीवन में दुःख का कारण भी बनता है। इस दुनिया में लोग इसलिए दुःखी नहीं कि उन्हें किसी बात की कमी है अपितु इसलिए दुखी हैं कि उनके सोचने का ढंग नकारात्मक है। सकारात्मक सोचो और सकारात्मक देखो, इससे आपको अभाव में भी जीने का आनन्द प्राप्त होगा। दुःख में सुख खोज लेना, हानि में लाभ खोज लेना, प्रतिकूलताओं में भी अवसर खोज लेना इसको ही सकारात्मक दृष्टिकोण कहा जाता है।
जीवन का ऐसा कोई बड़े से बड़ा दुःख नहीं जिससे सुख की परछाइयों को न देखा जा सके। जिन्दगी की ऐसी कोई बाधा नहीं जिससे कुछ प्रेरणा न ली जा सके। रास्ते में पड़े हुए पत्थर को आप मार्ग की बाधा भी मान सकते हैं और चाहें तो उस पत्थर को सीढ़ी बनाकर ऊपर चढ़ने का साधन भी बना सकते हैं। जीवन का आनन्द तो वही लोग उठा पाते हैं, जिनका सोचने का ढंग सकारात्मक होता है। नकारात्मकता त्यागें, सकारात्मक सोचें और जीवन को आनंद से जियें।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | एकादशी – पूर्ण रात्रि तक | नक्षत्र | हस्त – पूर्ण रात्रि तक |
|---|---|---|---|
| योग | सिद्धि – 03:11 ए एम, मई 27 तक | करण | वणिज – 05:42 पी एम तक |
| व्यतीपात | विष्टि – पूर्ण रात्रि तक | ||
| वार | मंगलवार | ||
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 रौद्र | बृहस्पति संवत्सर | रौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 12 | ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | कन्या | नक्षत्र पद | हस्त – 10:33 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | वृषभ | हस्त – 04:59 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | रोहिणी | हस्त – 11:27 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | रोहिणी | हस्त |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 42 मिनट्स 01 सेकण्ड |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 17 मिनट्स 39 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:29 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:16 ए एम से 04:57 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:36 ए एम से 05:38 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:02 पी एम से 12:57 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:46 पी एम से 03:41 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:19 पी एम से 07:40 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:20 पी एम से 08:22 पी एम |
| अमृत काल | 11:29 पी एम से 01:13 ए एम, मई 27 | निशिता मुहूर्त | 12:09 ए एम, मई 27 से 12:50 ए एम, मई 27 |
| रवि योग | पूरे दिन |