आज का पंचांग : धीरे-धीरे बढ़ते रहो

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

आज का विचार

गुणवान मनुष्य के संपर्क में रहकर सामान्य मनुष्य भी गौरव प्राप्त करता है, जैसे की फूलों के हार में रहकर धागा भी मस्तक के ऊपर स्थान प्राप्त करता है.!

आज का भगवद् चिन्तन
धीरे-धीरे बढ़ते रहो

तिनके-तिनके से घौंसला बनता है, बूँद-बूँद से सागर भरता है, ईंट-ईंट से महल का निर्माण होता है और कदम-कदम से ही हिमालय की ऊँचाई को पार किया जा सकता है। एक-एक फूल से माला का निर्माण होता है व माला पहनाये जाने वाले के सौंदर्य को और बढ़ा देती है। ऐसे ही हमारे छोटे-छोटे प्रयासों के पुष्प से ही विजयश्री की माला का निर्माण होता है जो जीवन को महका देती है।

लक्ष्य की ओर सदैव गतिमान रहना चाहिए। यदि हम दौड़ नहीं पाते हैं तो कोई बात नहीं बस ठहर नहीं जाना है। ठहर जाने की अपेक्षा धीरे-धीरे चलते रहना कई गुना बेहतर है। बैठा हुआ बाज भी पूरे दिन एक ही पेड़ पर रह जाता है और चलती हुई चींटी भी कई योजन की यात्रा कर लेती है। धीरे-धीरे ही सही बस अपने लक्ष्य की ओर सदैव बढ़ते रहने का हौसला रखो, देर तो हो सकती है, लेकिन हार नहीं होगी।

श्री सालासर बालाजी मंदिर

आज का पंचांग

सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
सूर्योदय05:36 ए एमसूर्यास्त07:27 पी एम
चन्द्रोदय01:32 ए एम, जून 10चन्द्रास्त01:16 पी एम
पञ्चाङ्ग
तिथिनवमी – 02:34 ए एम, जून 10 तकनक्षत्रपूर्व भाद्रपद – 09:39 ए एम तक
दशमीउत्तर भाद्रपद
योगप्रीति – 08:19 ए एम तककरणतैतिल – 03:05 पी एम तक
आयुष्मान्गर – 02:34 ए एम, जून 10 तक
वारमंगलवारवणिज
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2083 रौद्रबृहस्पति संवत्सररौद्र – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक
शक सम्वत1948 पराभवरौद्र
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते26ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम अधिक) – अमान्त
राजागुरु – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिचन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीमंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिबुध – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिगुरु – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिचन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिगुरु – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिगुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिचन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमीननक्षत्र पदपूर्व भाद्रपद – 09:39 ए एम तक
सूर्य राशिवृषभउत्तर भाद्रपद – 03:39 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रमृगशिराउत्तर भाद्रपद – 09:36 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदमृगशिराउत्तर भाद्रपद – 03:30 ए एम, जून 10 तक
  उत्तर भाद्रपद
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुग्रीष्मदिनमान13 घण्टे 51 मिनट्स 12 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुग्रीष्मरात्रिमान10 घण्टे 08 मिनट्स 46 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:31 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त04:15 ए एम से 04:55 ए एमप्रातः सन्ध्या04:35 ए एम से 05:36 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:04 पी एम से 12:59 पी एमविजय मुहूर्त02:50 पी एम से 03:45 पी एम
गोधूलि मुहूर्त07:26 पी एम से 07:46 पी एमसायाह्न सन्ध्या07:27 पी एम से 08:28 पी एम
अमृत काल04:37 ए एम, जून 10 से 06:12 ए एम, जून 10निशिता मुहूर्त12:11 ए एम, जून 10 से 12:52 ए एम, जून 10
सर्वार्थ सिद्धि योग09:39 ए एम से 05:36 ए एम, जून 10