
नई टिहरी : 7 जून को स्वर्गीय भगवती सकलानी के निधन के साथ उत्तराखण्ड ने एक ऐसी सरल, कर्मनिष्ठ और प्रकृति-प्रेमी व्यक्तित्व को खो दिया, जिन्होंने जीवनभर परिवार, समाज और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को अपने आचरण से जीवंत बनाए रखा। वे स्वतंत्रता सेनानी एवं वृक्षमानव विश्वेश्वर दत्त सकलानी की सहधर्मिणी थीं और उनके पर्यावरणीय मिशन की एक सशक्त आधारशिला रहीं।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई
भगवती सकलानी के पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक मूल्यों के संवर्धन तथा वृक्षमानव स्वतंत्रता सेनानी विश्वेश्वर दत्त सकलानी के पर्यावरणीय मिशन में उनके अमूल्य योगदान को सम्मान देते हुए उत्तराखण्ड सरकार द्वारा उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।यह सम्मान केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का ही नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के त्याग, समर्पण और मौन सेवाभाव का भी प्रतीक है, जो समाज और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राज्य सरकार द्वारा राजकीय सम्मान प्रदान किया जाना इस बात का प्रमाण है कि श्रीमती भगवती सकलानी का जीवन समाज और पर्यावरण के प्रति समर्पण का एक प्रेरणादायी उदाहरण था।

विश्वेश्वर दत्त सकलानी के पर्यावरण संरक्षण के अद्वितीय कार्यों के पीछे भगवती सकलानी का मौन त्याग, सहयोग और समर्पण सदैव उपस्थित रहा। उन्होंने केवल एक जीवनसंगिनी की भूमिका नहीं निभाई, बल्कि प्रकृति संरक्षण के उस महान अभियान की सहभागी बनीं, जिसने उत्तराखण्ड की बंजर पहाड़ियों को हरे-भरे वनों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वृक्षमानव के पर्यावरणीय मिशन में उनका योगदान

- अटूट सहयोग और प्रेरणा का स्रोत
जब विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने वृक्षारोपण को अपने जीवन का उद्देश्य बनाया, तब अनेक कठिनाइयाँ, आर्थिक चुनौतियाँ और सामाजिक विरोध उनके सामने आए। ऐसे समय में भगवती सकलानी ने उनका मनोबल बढ़ाया और हर परिस्थिति में उनका साथ दिया।
उनका यह विश्वास था कि प्रकृति की सेवा मानवता की सेवा है। उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए वृक्ष संरक्षण के कार्यों में अप्रत्यक्ष रूप से महत्वपूर्ण योगदान दिया। - प्रकृति के प्रति गहरा लगाव भगवती सकलानी स्वयं भी प्रकृति के प्रति अत्यंत संवेदनशील थीं। उन्होंने जल, जंगल और भूमि के संरक्षण को ग्रामीण जीवन का आधार माना। वे पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार मानती थीं।
उनकी सोच थी कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण और हरित धरोहर छोड़ना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। - पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों का संरक्षण उन्होंने परिवार में सादगी, अनुशासन, परिश्रम और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों का संचार किया। उनके द्वारा स्थापित ये जीवन मूल्य आज भी सकलानी परिवार की प्रेरणादायी विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने यह सिद्ध किया कि बड़े सामाजिक और पर्यावरणीय परिवर्तन मजबूत पारिवारिक सहयोग और सामूहिक प्रयासों से ही संभव होते हैं।
- महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण चेतना का उदाहरण
उत्तराखण्ड की महिलाओं की तरह उन्होंने भी प्रकृति और जीवन के गहरे संबंध को समझा। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि महिलाएँ पर्यावरण संरक्षण की सबसे महत्वपूर्ण संरक्षक हो सकती हैं। उन्होंने अपने आचरण से समाज को यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वृक्षमानव श्री विश्वेश्वर दत्त सकलानी की प्रेरणा विश्वेश्वर दत्त सकलानी ने अपने जीवनकाल में लाखों वृक्ष लगाकर उत्तराखण्ड में पर्यावरण संरक्षण का एक अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा था—
“वृक्ष ही मेरा परिवार हैं।”
इस महान संकल्प की सफलता में श्रीमती भगवती सकलानी का सहयोग और त्याग अविस्मरणीय रहा। उन्होंने न केवल उनके सपनों को समझा, बल्कि उन्हें साकार करने में निरंतर साथ दिया।
उनकी विरासत और प्रेरणा भगवती सकलानी का जीवन हमें सिखाता है कि समाज और प्रकृति की सेवा केवल सार्वजनिक मंचों पर किए गए कार्यों से ही नहीं होती, बल्कि निःस्वार्थ सहयोग, त्याग और सकारात्मक जीवन मूल्यों से भी होती है।
उनकी विरासत निम्नलिखित संदेश देती है—
प्रकृति संरक्षण प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
परिवार और समाज के सहयोग से बड़े परिवर्तन संभव हैं।
महिलाओं की भूमिका पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सादगी, सेवा और समर्पण जीवन के सर्वोच्च मूल्य हैं।
श्रद्धांजलि
स्वर्गीय श्रीमती भगवती सकलानी का जीवन त्याग, करुणा और पर्यावरण के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक था। उन्होंने एक ऐसी हरित सोच को पोषित किया, जिसने हजारों लोगों को प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित किया।
उनके निधन से एक युग का अंत हुआ है, किन्तु उनके आदर्श और योगदान सदैव प्रेरणा देते रहेंगे।
“वृक्षों की छाया में मानवता का भविष्य सुरक्षित है, और उस भविष्य को संवारने वालों में श्रीमती भगवती सकलानी का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।”
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः।