पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.
आज गुरुवार, 11 जून को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है। इसे परमा, पुरुषोत्तमी या कमला एकादशी भी कहते हैं। अधिक मास में होने के कारण ये व्रत तीन साल में एक बार आता है।
धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से पाप, दुख और दरिद्रता दूर होती है। इस दिन भगवान विष्णु-लक्ष्मी की पूजा, व्रत, दान, जप, भजन और रात में जागरण किया जाता है।
भविष्योत्तर पुराण के एकादशी माहात्म्य नाम के अध्याय में इस व्रत का जिक्र किया गया है। वैष्णव परंपरा में प्रचलित कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को अधिक मास के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का नाम, विधि और महत्व बताया था। कथा के भीतर कौण्डिन्य ऋषि ने सुमेधा ब्राह्मण और उनकी पत्नी पवित्रा को यह व्रत करने की सलाह दी थी।
भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रूप की पूजा
सुबह स्नान कर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प करें। इस दिन भगवान विष्णु के पुरुषोत्तम रुप की पूजा करने का विधान है। इस रूप में भगवान की चार भुजाएं होती है। जिनके हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म रहते हैं।
पूजा में दीप, धूप, पुष्प, तुलसी और नैवेद्य अर्पित करें। दिनभर संयम रखें। सेहत का ध्यान रखते हुए फलाहार या निर्जल व्रत किया जा सकता है। शाम को विष्णु सहस्रनाम, गीता, एकादशी कथा या भगवान विष्णु के मंत्रों का जप करें। रात में भजन-कीर्तन और जागरण का भी महत्व बताया गया है। द्वादशी पर पारण करें और जरूरतमंदों को दान दें।
सुमेधा-पवित्रा की कथाः कौण्डिन्य ऋषि ने बताई परमा एकादशी व्रत की विधि
काम्पिल्य नगर में सुमेधा नाम के ब्राह्मण और उनकी पत्नी पवित्रा रहते थे। दोनों बहुत गरीब थे, लेकिन धर्म और अतिथि सेवा में कमी नहीं रखते थे। गरीबी से परेशान होकर सुमेधा ने परदेश जाने का मन बनाया, लेकिन पवित्रा ने कहा कि भाग्य और पिछले कर्मों का फल घर पर रहकर धर्म से ही बदलेगा।
कुछ समय बाद कौण्डिन्य ऋषि उनके घर आए। दोनों ने अपनी क्षमता के अनुसार ऋषि की सेवा की। पवित्रा ने उनसे दरिद्रता दूर करने का उपाय पूछा। ऋषि ने कहा कि अधिक मास के कृष्ण पक्ष की परमा एकादशी का व्रत करो। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, दान और जागरण करने से दुख, पाप और दरिद्रता दूर होती है।
सुमेधा और पवित्रा ने श्रद्धा से यह व्रत किया। इसके बाद उनके जीवन में बदलाव आया। कथा के अनुसार, एक राजकुमार ने उन्हें सुंदर घर और जीवन चलाने के लिए गांव दिया। दोनों ने जीवन में सुख पाया और अंत में भगवान विष्णु के लोक को प्राप्त हुए।
आज का पंचांग
सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| सूर्योदय | 05:36 ए एम | सूर्यास्त | 07:28 पी एम |
|---|---|---|---|
| चन्द्रोदय | 02:44 ए एम, जून 12 | चन्द्रास्त | 03:20 पी एम |
पञ्चाङ्ग
| तिथि | एकादशी – 10:36 पी एम तक | नक्षत्र | रेवती – 08:16 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| द्वादशी | अश्विनी | ||
| योग | शोभन – 01:00 ए एम, जून 12 तक | करण | बव – 11:52 ए एम तक |
| अतिगण्ड | बालव – 10:36 पी एम तक | ||
| वार | गुरुवार | कौलव | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2083 का मन्त्री मण्डल
| विक्रम सम्वत | 2083 सिद्धार्थी | बृहस्पति संवत्सर | सिद्धार्थी – 03:53 पी एम, अप्रैल 21, 2026 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1948 पराभव | रौद्र | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | ज्येष्ठ (अधिक) – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 28 | ज्येष्ठ (अधिक) – अमान्त | |
| राजा | गुरु – शासन व्यवस्था के स्वामी | सेनाधिपति | चन्द्र – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक |
| मन्त्री | मंगल – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामी | धान्याधिपति | बुध – रबी की फसलों के स्वामी |
| सस्याधिपति | गुरु – खरीफ की फसलों के स्वामी | मेघाधिपति | चन्द्र – मेघ एवं वर्षा के स्वामी |
| धनाधिपति | गुरु – धन एवं कोष के स्वामी | नीरसाधिपति | गुरु – धातु, खनिज आदि के स्वामी |
| रसाधिपति | शनि – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामी | फलाधिपति | चन्द्र – फल-पुष्पादि के स्वामी |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | मीन – 08:16 ए एम तक | नक्षत्र पद | रेवती – 08:16 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| मेष | अश्विनी – 01:53 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | वृषभ | अश्विनी – 07:27 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | मृगशिरा | अश्विनी – 12:59 ए एम, जून 12 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | मृगशिरा – 01:18 ए एम, जून 12 तक | अश्विनी | |
| मृगशिरा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | ग्रीष्म | दिनमान | 13 घण्टे 51 मिनट्स 59 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | ग्रीष्म | रात्रिमान | 10 घण्टे 08 मिनट्स 02 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:32 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:15 ए एम से 04:55 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 04:35 ए एम से 05:36 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:04 पी एम से 01:00 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:51 पी एम से 03:46 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 07:27 पी एम से 07:47 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 07:28 पी एम से 08:29 पी एम |
| अमृत काल | 05:59 ए एम से 07:30 ए एम | निशिता मुहूर्त | 12:12 ए एम, जून 12 से 12:52 ए एम, जून 12 |
| 11:49 पी एम से 01:17 ए एम, जून 12 | |||
| सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |