आज का पंचांग : जीवन की सार्थकता

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, ‘हिमशिखर खबर‘ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है.

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी, रोद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, ज्येष्ठ |

आज दशमी तिथि 06:12 PM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र चित्रा 01:59 PM तक उपरांत स्वाति | परिघ योग 10:22 AM तक, उसके बाद शिव योग | करण गर 06:12 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 12:29 PM – 02:09 PM है | आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा |

प्रभात चिंतन

शनैः पन्थाः शनैः कन्था शनैः पर्वतमस्तके।
शनैर्विद्या शनैर्वित्तं पञ्चैतानि शनैः शनैः॥

भावार्थ:- धीरे-धीरे (धैर्य से) रास्ता काटना या चलना चाहिए, धीरे-धीरे वैराग्य लेना चाहिये, धीरे धीरे पर्वत पर चढ़ना चाहिए, धीरे-धीरे विद्या प्राप्त करना चाहिए और पैसे भी धीरे धीरे कमाना चाहिए।

आज का भगवद् चिन्तन

जीवन की सार्थकता

मनुष्य जीवन में अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन की संभावना के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह चाहे तो सदैव अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्ट बनाने में अथवा निकृष्ट से निकृष्ट बना पाने में समर्थ होता है। मनुष्य जीवन के अलावा अन्य सभी प्राणी प्रकृति के ही अधीन होते हैं। उनमें जन्म के बाद अपने जीवन परिवर्तन की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है।

मनुष्य अपने संग से, अपने संस्कारों से एवं अपने परिवेश से जीवन को परिवर्तित करने में सक्षम होता है। यदि कुसंग से अपना पतन भी करा सकता है तो सुसंग से जीवन उन्नति एवं कल्याण के मार्ग पर भी बढ़ सकता है। उस प्रभु ने कृपा करके हमको मानव देह प्रदान किया है तो फिर श्रेष्ठ पथ का अनुगमन करते हुए, श्रेष्ठ का ही चिंतन करते हुए अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहना ही जीवन की परम सार्थकता है।