आज का पंचांग : कर्म की अनिवार्यता

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है.

पंडित उदय शंकर भट्ट

आषाढ़ कृष्ण पक्ष द्वितीया, रोद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083, शक संवत पराभव 1948, ज्येष्ठ.

आज द्वितीया तिथि 09:38 AM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 09:27 AM तक उपरांत श्रवण | वैधृति योग 04:38 PM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग | करण गर 09:38 AM तक, बाद वणिज 10:32 PM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 02:11 PM – 03:51 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा.

कर्म की अनिवार्यता

सृष्टि में कोई भी व्यक्ति बिना कर्म किए नहीं रह सकता है। हम सभी या तो विचारों के माध्यम से सक्रिय हैं अथवा क्रियाओं के माध्यम से या फिर कारण बनकर कर्म में योगदान कर रहे हैं। कोई भी प्राणी अकर्मण्य नहीं है।


कर्म की व्याख्या तीन श्रेणियों में है इनमें एक क्रियमाण कर्म (वर्तमान में किए गए कर्म), दूसरा संचित कर्म (पिछले कर्मों का संग्रह) और तीसरा होता है प्रारब्ध (भाग्य के रूप में फल देने वाले कर्म)। सभी प्रकृति से उत्पन्न गुणों (सत्त्व, रजस्, तमस्) के वशीभूत होकर अनिच्छा से भी कर्म करने को बाध्य हैं।


कहने का तात्पर्य हैं कि कर्म जीवन का आधार है। कोई भी प्राणी कर्म से मुक्त नहीं हो सकता। प्रारब्ध (भाग्य) को भोगते हुए भी, व्यक्ति को निष्काम कर्मयोग द्वारा अपने संचित और क्रियमाण कर्मों को शुद्ध करना चाहिए क्योंकि यह गीता में बताया गया मार्ग है जो आत्म-उन्नति की ओर ले जाता है।

आज का विचार

अपनी जिंदगी के किसी भी दिन को कोसना नहीं, क्योंकि अच्छा दिन खुशियाँ लाता है, और बुरा दिन अनुभव। एक सफल जिंदगी के लिए दोनों जरूरी है.!

प्रभात चिंतन

दारिद्रय रोग दुःखानि बंधन व्यसनानि च।
आत्मापराध वृक्षस्य फलान्येतानि देहिनाम्।।

भावार्थ:- दरिद्रता, रोग, दुख, बंधन और विपदाएं तो अपने द्वारा किए बुरे कर्म -अपराध रूपी वृक्ष के फल हैं। इन फलों का उपभोग मनुष्य को भोगना ही पड़ता है।