सेवा में,
श्रीमान नरेंद्र मोदी जी
प्रधानमंत्री भारत सरकार
माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी सादर प्रणाम, मैं भाई कमलानंद (डॉ कमल टावरी ) लगभग 80 साल का हो गया हूं. मैं अपने जीवन काल में पहले आर्मी और फिर आईएएस में रहा हूं. मैंने 60 किताबें लिखी हैं. जब मैं उस समय प्लानिंग कमीशन में था, आप उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तो मैं उस समय आपसे मिला था.
पी एम मोदी जी आप एक बहुत बड़ी आशा की किरण हैं. सरकार को चलाने के लिए नेतृत्व के जो भी गुण चाहिए, वह सब आपके भीतर मौजूद हैं. मैं आपको यहां खुला पत्र इसलिए लिख रहा हूं कि मुझे लग रहा है कि अब समय आ गया है कि जो भी थोड़ा बहुत सज्जन शक्ति हैं, अच्छी नीयत वाले हैं, अनुभवी हैं और दिल में कुछ अधूरे सपने लिए बैठे हुए हैं उन्हें जरूर अपने विचारों को व्यवहारिक रूप देकर, कार्यान्वित करने योग्य करके अंतर को पाट कर आगे बढ़ना चाहिए.
आप एक बहुत अच्छे वक्ता हैं और लोगों को अच्छे विचार देते हैं. मुझे लगता है कि कुछ ऐसी खाई हैं, गैप्स हैं, जिन पर यदि ध्यान दिया जाए तो एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी कदम, अधूरा सपना पूरा हो सकता है.
कुछ अनुभव ऐसे होते हैं, जो इतिहास की दिशा तय कर देते हैं। आपसे जुड़ा मेरा पहला अनुभव भी ऐसा ही था।
अनुशासन, संगठन के प्रति समर्पण, गहन ज्ञान और हर चुनौती को स्वीकार करने का साहस, यही गुण हैं जिन्होंने आपको भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला नेता बनाया.
समय बहुत बड़ा बलवान होता है. समय ही समय-समय पर चेताता है कि यह छूट गया, यह चूक गया, इसलिए इसको समय रहते हुए पूरा कर लो.
ऐसी स्थिति में मेरे निम्न बिंदु आपके विचारार्थ आदर्शवादी नहीं बल्कि व्यावहारिक, समय की मांग है.
- मैंने लगभग 60 किताबें लिखी हैं. लखनऊ में बक्सी का तालाब निदेशक रहते हुए बक्सी का तालाब की 60 दृष्टिकोण श्रृंखलाएं निकाली थी. उद्देश्य यह था कि जब तक हम दृष्टिकोण नहीं बदलेंगे, केवल अपनी जगह से ही उसको देखते रहेंगे तो बात नहीं बनेगी. ‘दृष्टि’ और ‘कोण’ दो महत्वपूर्ण शब्द हैं. किसी में नज़रिया है, बोध है, ऑब्जरवेशन है, एंगल है, हॉलिस्टिक है .
- मेरा पहला अनुरोध है कि सभी से अनुरोध करें कि जिस व्यक्ति ने जहां-जहां लिखा है और यदि वह आज की चुनौतियों का समाधान है, तो उसको प्रस्तुत करे और उस पर नीति आयोग की ड्यूटी लगाएं कि उनके पास वालंटियर एक्शन सेल है, दूसरा यह की उनके पास विलेज एंटरप्रेन्योरशिप डिवीजन है, जिसका मैं निदेशक रह चुका हूं, हमने उस पर बहुत काम किया था.
- सज्जन शक्ति के साथ जिसने जो जो लिखा है, उसको व्यवहारिक रूप से मुख्य रूप से सरकार से पैसा ना मांगे ग्रांट न मांगे और यदि ग्रांट मंगानी है तो ग्रांट का रेअप्पेअरशिप करवाए, उसका रिइंजीनियरिंग करवाए, उसका डिजाइनिंग करवाए और उसको अब धीरे-धीरे ग्रांट की बजाय रिवाल्विंग फंड की तरफ लेते हुए चले जाए.
- इसी परिप्रेक्ष्य में हमारी तीन किताबें हैं. पहली मार्केटिंग द अनमार्केटेड. इसमें भ्रष्टाचार, चुनाव सुधार और विश्लेषण यह भाग है. दूसरी किताब ऑपरेशनाइसिंग होलिस्टिक डेवलपमेंट है. तीसरी किताब आपदा प्रबंधन और पंचायती राज. यह किताब सज्जन शक्ति को लेते हुए आधार देने वाली है. इसमें पर्यावरणीय चुनौतियों का जनता का विकल्प है. जब तक हम वार्ड को नहीं पकड़ेंगे, तब तक आगे नहीं बढ़ पाएंगे. वार्ड हमारा आधार है और वार्ड का कार्यकर्ता और लीडर मुख्य है.
- आज करीब 3 करोड लोग नेतृत्व देने के लिए तड़प रहे हैं. डेढ़ करोड़ से 3 करोड लोग लड़ रहे हैं, हार रहे हैं और जीत रहे हैं. इसके लिए हमने ब्लॉक लेवल पर परिवर्तन की नेतृत्व शाला शुरू कर दी है और इसको चलाने के लिए सरकार से पैसा नहीं मांगते हैं.
- गंगा एक्शन प्लान पर हमने एक पत्र बजरंग लाल जी गुप्ता को भेजा है, जिसकी कॉपी संलग्न की जा रही है. यह व्यावहारिक है. इसी के साथ हमारे पास कई अपवाद भी हैं, जिन्होंने अपने प्रयासों से अच्छा कार्य किया है.
- हमारे आस पास गाँव में या शहर में जहां-जहां जो खाली पड़ा है, वहां पर कुछ कार्य शुरू किया जा सकता है. कई गांव में जमीन खाली पड़ी है. सड़क के किनारे भी भूमि खाली पड़ी हैं, जिसमें में प्लांटेशन किया जा सकता है. इन सबको ब्रिजिंग द गैप्स, सज्जन शक्ति को लेकर, नाटक रहित क्योंकि पाखंड ने बहुत बड़ा नुकसान कर दिया है.
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ मासेज का कैसे भला हो. इसमें जिलेवार क्रेडिट डिपॉजिट रेशियो, फॉरेस्ट कवर, ग्राम स्तर पर जो-जो खाली पड़े संसाधन है, स्वराज के लिए, स्वावलंबन के लिए, स्वतंत्रता के लिए, अधूरे सपनों के लिए, उत्साह के लिए.
- आपने आयुष के साथ बहुत बड़ा अन्याय किया है, क्योंकि इस विभाग में जो सेक्रेटरी साहब बैठे हैं वो जनता से नहीं जुड़े हुए हैं. गाय पर आधारित पंचगव्य विद्यापीठ का मैं वाइस चांसलर हूं, हमने कई रिसर्च करके असाध्य रोगों का निदान कर दिया है. आपने योग को अंतरराष्ट्रीय स्थान दिलवा दिया है. आपने भारत की कई चीजों को अंतरराष्ट्रीय स्थान दिलवा दिया है. क्योंकि मैं जर्मनी यूरोप भी जाता रहता हूं, कभी कभी लेक्चर देने के लिए. मगर जो जड़ मजबूत होनी चाहिए, सोलिडनेस आना चाहिए, स्वावलंबन, स्वाभिमान, स्वरोजगार, स्वतंत्रता, स्वदेशी यह शब्द जमीन पर उतरने चाहिए, इसके लिए ग्राम सभा को सलाहकार सेवा में लेना होगा. यह अन्ना हजारे जी ने बोला है. आपने अन्ना हजारे जी की तारीफ की थी जब केजरीवाल हार गए थे. मगर तारीफ करना एक बात है, उनके विचार लेना दूसरी बात है. अब उनको मंत्री का पद नहीं चाहिए. अन्ना हजारे जी ने भी ग्रांट लेकर काम शुरू किया था. लेकिन पैसे का दुरूपयोग और बर्बादी नहीं की. ऐसी दशा में जो जो जहां-जहां आशा की किरण है, उनको लेकर ब्लॉक एडॉप्शन लो और ब्लॉक को देशी गाय के साथ जोड़ो.
- देशी गाय के बगैर कोई भी काम संपूर्ण होना असंभव है यह मेरा पक्का मत है. इसलिए खाली पड़ी हुई जमीन में बद्री गाय के गांव बनाए जाने चाहिए. इसमें बात बजट की कमी नहीं है. बात है इम्पैक्ट की, स्वाभिमान की.
इन बिंदुओं पर एक्शन लेने के लिए हमने सरकारी सरकारी स्वाभिमानी अभियान बनाया है जिसमें पूर्व सांसद प्रदीप श्री प्रदीप गांधी जी भी हैं, जिस पर तेजी से कार्य किया जा रहे है.