पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आज बुधवार को सूर्यदेव मिथुन राशि से निकलकर कर्क में आ जाएगा। अब अगले 6 महीने तक दक्षिणायन रहेगा। मकर संक्रांति से उत्तरायण शुरू होगा। कर्क संक्रांति पर स्नान-दान किया जा सकता है। अग्नि पुराण के अनुसार, कर्क संक्रांति के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और वस्त्र व भोजन दान करने की भी परंपरा है।
कर्क संक्रांति पर सूर्य पूजा और दान का महत्व
कर्क संक्रांति के दिन सूर्य देव की विशेष पूजा का विधान है। अग्नि पुराण के अनुसार, प्रातः काल स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। जल में गंगाजल, अक्षत, लाल फूल और रोली मिलाकर ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य दें। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। अन्न, वस्त्र, फल और जल का दान करना शुभ माना जाता है। विष्णु पुराण के अनुसार, इस दिन अन्न और वस्त्र दान करने से महान फल मिलता है।
सुख-समृद्धि बढ़ाने वाली कर्क संक्रांति
ये संक्रांति सुख देने वाली होगी। यह संक्रांति व्यापारियों के लिए अच्छी रहेगी। वस्तुओं की लागत सामान्य होगी, धन और समृद्धि लाएगी। लोगों की सेहत में सुधार होगा, देश में अनाज भण्डारण बढ़ेगा।
साल में दो बार सूर्य की स्थिति में बदलाव साल में दो बार सूर्य की स्थिति में बदलाव होता है। कर्क संक्राति (जुलाई) पर सूर्य दक्षिणायन होते हैं और अगले 6 महीने तक इसी तरह रहते हैं। इसके बाद मकर संक्रांति (जनवरी) पर उत्तरायण होते हैं। सूर्य की ये स्थिति 6-6 महीने तक रहती है। दक्षिणायन के दौरान बारिश और ठंड की शुरुआत वाला मौसम रहता है। वहीं उत्तरायण के वक्त ठंड और बारिश की शुरुआत का समय रहता है
दक्षिणायन के समय देवताओं की रात
कर्क संक्रांति दक्षिणायन के पहले दिन का प्रतीक है और इसे देवताओं की रात्रि की शुरुआत माना जाता है। यह समय आत्मनिरीक्षण, आत्म-अनुशासन और आंतरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
श्रावण कृष्ण पक्ष षष्ठी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आषाढ़ आज है कर्क संक्रांति|
आज षष्ठी तिथि 09:02 PM तक उपरांत सप्तमी | नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 04:50 AM तक उपरांत रेवती | शोभन योग 11:57 AM तक, उसके बाद अतिगण्ड योग | करण गर 09:53 AM तक, बाद वणिज 09:02 PM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 12:00 PM – 1:30 PM है | आज चन्द्रमा मीन राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – आषाढ़
तिथि
- कृष्ण पक्ष षष्ठी – Jul 15 10:39 PM – Jul 16 09:02 PM
- कृष्ण पक्ष सप्तमी – Jul 16 09:02 PM – Jul 17 07:09 PM
नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा – Jul 16 05:46 AM – Jul 17 04:50 AM
- रेवती – Jul 17 04:50 AM – Jul 18 03:39 AM