पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कैलेंडर
तिथि | द्वितीया सुबह 10:55 बजे तक 🌒 |
नक्षत्र | विशाखा प्रातः 03:10 बजे तक , 16 अप्रैल 💫 |
तृतीया 🌒 | |
अनुराधा 💫 | |
योग | सिद्धि रात्रि 11:33 बजे तक 💫 |
करण | गैराज सुबह 10:55 बजे तक 💫 |
व्यतिपात 💫 | |
वनीजा 16 अप्रैल, 12:07 AM तक 💫 | |
काम करने के दिन | मंगलावाड़ा 💫 |
विष्टि 💫 | |
पक्ष | कृष्ण पक्ष 🌑 |
चंद्र मास, संवत और बृहस्पति संवत्सर
विक्रम संवत | 2082 कलायुक्त 💫 |
संवत्सर | कालायुक्त 03:07 अपराह्न तक , 25 अप्रैल, 2025 💫 |
शक संवत | 1947 विश्वावसु 💫 |
सिद्धार्थी 💫 | |
गुजराती संवत | 2081 नाला 💫 |
चन्द्रमासा | वैशाख – पूर्णिमांत 💫 |
दायाँ/गेट | 2 💫 |
चैत्र – अमंता 💫 |
राशि और नक्षत्र
राशि | तुला 08:27 PM तक ♎ |
नक्षत्र पद | विशाखा 06:58 AM तक 💫 |
वृश्चिक ♏ | |
विशाखा 01:43 PM तक 💫 | |
सूर्य राशि | मेष♈ |
विशाखा 08:27 PM तक 💫 | |
सूर्य नक्षत्र | अश्विनी 💫 |
विशाखा प्रातः 03:10 बजे तक , 16 अप्रैल 💫 | |
सूर्य पद | अश्विनी 💫 |
अनुराधा 💫 |
आज का विचार
भाग्य बारिश के पानी के सामान होता है, और परिश्रम कुएँ के जल के सामान होता है। मनुष्य के जीवन में बंधन हमेशा दुःख देता हैं। और संबंध हमेशा सुख देता हैं.!
“भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥
अर्थ- जहां महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहां भूत, पिशाच पास भी नहीं फटक सकते।
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥
अर्थ- वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
अर्थ- हे हनुमान जी! विचार करने में, कर्म करने में और बोलने में, जिनका ध्यान आपमें रहता है, उनको सब संकटों से आप छुड़ाते है।”
श्रीरामचरितमानस
श्रीराम नाम प्रभाव
सबरी गीध सुसेवकनि
सुगति दीन्हि रघुनाथ ।
नाम उधारे अमित खल
बेद बिदित गुन गाथ ।।
( बालकांड दो. 24)
मानस के आरंभ में गोस्वामी जी नाम महिमा बताते हुए कहते हैं कि राम नाम की ऐसी महिमा है कि राम जी ने तो सबरी जी , जटायु आदि सेवारत सेवकों को मुक्ति दी परंतु श्रीराम नाम ने अनगिनत दुष्टों का उद्धार कर दिया । राम नाम की महिमा का गुणगान वेदों ने भी गाया है ।
मित्रों! आप चाहे सज्जन हो या दुर्जन, यदि राम नाम आप अपना लेते हैं तो दुर्गति नहीं सुगति मिलनी तय है अतएव जय राम , जय राम ,
दया पर संदेह
एक बार एक अमीर सेठ के यहाँ एक नौकर काम करता था। अमीर सेठ अपने नौकर से तो बहुत खुश था, लेकिन जब भी कोई कटु अनुभव होता तो वह ईश्वर को अनाप शनाप कहता और बहुत कोसता था।
एक दिन वह अमीर सेठ ककड़ी खा रहा था। संयोग से वह ककड़ी कच्ची और कड़वी थी। सेठ ने वह ककड़ी अपने नौकर को दे दी। नौकर ने उसे बड़े चाव से खाया जैसे वह बहुत स्वादिष्ट हो।
अमीर सेठ ने पूछा – ककड़ी तो बहुत कड़वी थी। भला तुम ऐसे कैसे खा गये ?
नौकर बोला – आप मेरे मालिक है।रोज ही स्वादिष्ट भोजन देते है।अगर एक दिन कुछ बेस्वाद या कड़वा भी दे दिया तो उसे स्वीकार करने में भला क्या हर्ज है ?
अमीर सेठ अपनी भूल समझ गया।अगर ईश्वर ने इतनी सुख–सम्पदाएँ दी है,और कभी कोई कटु अनुदान या सामान्य मुसीबत दे भी दे तो उसकी सद्भावना पर संदेह करना ठीक नहीं,वह नौकर और कोई नहीं,प्रसिद्ध चिकित्सक हकीम लुकमान थे
असल में यदि हम समझ सकें तो जीवन में जो कुछ भी होता है,सब परमात्मा की दया ही है।परमात्मा जो करता है अच्छे के लिए ही करता है..!!
आज का भगवद् चिंतन
जीवन में अनुशासन
जीवन को अनुशासन में जिया जाना चाहिए। पानी अनुशासन हीन होता है तो बाढ़ का रूप धारण कर लेता है। हवा अनुशासन हीन होती है तो आँधी बन जाती है और अग्नि यदि अनुशासन हीन हो जाती है तो महा विनाश का कारण बन जाती है। अनुशासनहीनता स्वयं के जीवन को तो विनाश की तरफ ले ही जाती है साथ ही साथ दूसरों के लिए भी विनाश का कारण बन जाती है।
अनुशासन में बहकर ही एक नदी सागर तक पहुँचकर सागर ही बन जाती है। अनुशासन में बँधकर ही एक बेल जमीन से ऊपर उठकर वृक्ष जैसी ऊँचाई को प्राप्त कर पाती है और अनुशासन में रहकर ही वायु फूलों की सुगंध को अपने में समेटकर स्वयं सुगंधित होकर चारों दिशाओं को सुगंध से भर देती है। गाड़ी अनुशासन में चले तो यात्रा का आनंद और बढ़ जाता है। इसी प्रकार जीवन भी अनुशासन में चले तो जीवन यात्रा का आनंद भी बढ़ जाता है।