पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष त्रयोदशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |
आज मासिक शिवरात्रि है। इस दिन लोग शिव चतुर्दशी व्रत रखते हैं। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि आती है और यह शिव-उपासना का अत्यंत शुभ दिन माना गया है।
आज त्रयोदशी तिथि 12:26 PM तक उपरांत चतुर्दशी | नक्षत्र भरणी 06:00 PM तक उपरांत कृत्तिका | परिघ योग 04:57 PM तक, उसके बाद शिव योग | करण तैतिल 12:26 PM तक, बाद गर 10:33 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 12:16 PM – 01:36 PM है | आज 11:14 PM तक चन्द्रमा मेष उपरांत वृषभ राशि पर संचार करेगा |
हमारे जीवन में कुछ पुस्तकें जरूर होनी चाहिए। और जब भी कोई उलझन या भटकाव आए, उन पुस्तकों को पढ़ें। फिर वो चाहे गीता हो, महाभारत, रामचरितमानस, भागवत या और कोई पुस्तक। उनमें जो संकेत दिए हैं, पंक्तियों के बीच उनको ढूंढते रहें।
ऐसे ग्रंथ पढ़ने का अर्थ ही यह है कि उसका भावार्थ उठाया जाए और उसको जीवन से जोड़ा जाए। आज की पीढ़ी को कुछ बातें आज के उदाहरण से ही समझ में आती हैं। हमारे देश का जो सबसे बड़ा सत्ताधारी दल है, वो जब चौंकाने वाला निर्णय लेता है तो लोगों को लगता है यह बड़ा आश्चर्यजनक है। लेकिन उनके अतीत के राजनेताओं ने कुछ गहरी पुस्तकें लिखी हैं।
और जो निर्णय आज लिए जा रहे हैं, उनका वर्णन उन पुस्तकों में हो चुका है। तो ये सबक लेने वाली बात है कि यदि ऊंचाई पर जाना है तो ग्रंथों को पढ़ो। ऊंचाई पर टिकना है तो लगातार उन ग्रंथों में जो सीख दी गई है, जो संकेत हैं- उनको जीवन से जोड़ो। भले ही एक पृष्ठ रोज पढ़ें, पर पढ़िए जरूर।
आज का भगवद् चिन्तन
शास्त्रों की सीख
शास्त्र हमारे पथ प्रदर्शक हैं। शास्त्रों के आश्रय में जिया गया जीवन स्वयं में दिव्य एवं समाज के लिए एक आदर्श बन जाता है। शास्त्र दीर्घजीवी नहीं बनाते पर दिव्यजीवी बना देते हैं। शास्त्रों के निरंतर आश्रय से ही मनुष्य के भीतर सद्गुणों एवं श्रेष्ठ गुणों का अंकुरण होता है।
श्रीमद् भागवत सत्य को देने वाला ग्रंथ है। सत्यं परं धीमहि अर्थात् उस परम सत्य तक हमें पहुँचाने वाला ग्रंथ। श्रीरामचरित मानस सब को देने वाला ग्रंथ है। सिया राम मय सब जग अर्थात् सब के भीतर उस परम ब्रह्म उन युगल छवि को प्रतिष्ठित अथवा तो प्रतिबिंबित कराने वाला ग्रंथ है।
श्रीमद् भगवद्गीता सम को देने वाला ग्रंथ है। समत्वं योग उच्यते। प्रत्येक परिस्थिति में सम अथवा तो एक रुप बने रहने की प्रेरणा अथवा तो अपने कर्तव्य पथ पर निष्काम भाव से अडिग बने रहने की प्रेरणा देने वाला ग्रंथ गीता है। सबके प्रति समत्व का भाव रखते हुए सत्य की प्राप्ति का निरंतर प्रयास ही सदग्रंथों की प्रमुख सीख है।