पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कार्तिक कृष्ण पक्ष तृतीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |
आज तृतीया तिथि 10:54 PM तक उपरांत चतुर्थी | नक्षत्र भरणी 08:02 PM तक उपरांत कृत्तिका | वज्र योग 09:32 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग | करण वणिज 12:38 PM तक, बाद विष्टि 10:54 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 01:41 PM – 03:08 PM है | आज 01:23 AM तक चन्द्रमा मेष उपरांत वृषभ राशि पर संचार करेगा |
आज का विचार
यदि आप किसी को यह इत्मीनान दिलाना चाहते हैं कि वह गलती पर है तो उसे वास्तव में करके दिखाओ। आदमी देखी हुई वस्तुओं पर विश्वास करते हैं, उन्हें देखने दो.
आज का भगवद् चिन्तन
मित्र और शत्रु की पहचान
गलत मार्ग से रोकना और उचित मार्ग की तरफ बढ़ाना ही मित्रता का श्रेष्ठ एवं स्वाभाविक गुण भी है। विरोध करने वाला शत्रु नहीं अपितु गलत कार्यों का विरोध न करने वाला परम शत्रु होता है। दुर्योधन ने चाचा विदुर की बात मान ली होती तो महाभारत नहीं होता और रावण ने भाई विभीषण की बात मानी होती तो लंका विध्वंश नहीं होता। वास्तव में सच्चा मित्र वही है जो हमारी मति सुधार दे, जीवन को श्रेष्ठ गति देते हुए गोविन्द के चरणों में रति प्रदान कर दे।
लोग सोचते हैं कि स्वजन-प्रियजन वही है, जो प्रत्येक स्थिति में आपका साथ दें लेकिन वास्तव में सच्चे प्रियजन वही हैं जो सदैव अनुचित मार्ग से आपको बचाने का प्रयास करें। वह व्यक्ति किंचित आपका शत्रु नहीं हो सकता जो आपको आपकी गलतियों का बार-बार स्मरण कराये अपितु वह आपका शत्रु अवश्य है जो आपके गलत दिशा में बढ़ते हुए कदमों को देखकर भी रोकने का प्रयास न करे। सौभाग्यशाली हैं वो लोग जिनके जीवन में उचित-अनुचित की परख करवाने वाले मित्र होते हैं।