महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन होंगे उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA के उम्मीदवार

भाजपा की अगुआई वाली एनडीए ने उपराष्ट्रपति के लिए होने वाले चुनाव को लेकर अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। तमिलनाडु के सीपी राधाकृष्णन एनडीए के उम्मीदवार बनाए गए हैं। राधाकृष्णन अभी महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। जेपी नड्डा ने उनके नाम का एलान किया है।

नई दिल्ली : महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। रविवार को हुई भाजपा संसदीय दल की बैठक में उनके नाम पर सहमति बनी। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राधाकृष्णन के नाम का ऐलान किया।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेता मौजूद थे। राधाकृष्णन 21 अगस्त को नामांकन दाखिल करेंगे। इस दौरान NDA शासित राज्यों के सभी मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी शामिल होंगे।

सीपी राधाकृष्णन का जन्म 4 मई 1957 को तिरुपुर, तमिलनाडु में हुआ था। 16 साल की उम्र में ही RSS से जुड़ गए थे। 1998 और 1999 में कोयंबटूर सीट से सांसद बने थे। 2004 से 2007 तक तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं। 2023 में झारखंड के राज्यपाल बने थे।

कौन हैं सी पी राधाकृष्णन?

चंद्रपुरम पोनुसामी (सी पी) राधाकृष्णन बीजेपी के पूर्व वरिष्ठ नेता हैं और लंबे समय तक संगठन में सक्रिय रहे हैं। वे दो बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं और पार्टी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष पद पर भी कार्य कर चुके हैं।

सी पी राधाकृष्णन ने दक्षिण भारत में भाजपा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वे तमिलनाडु के कोयंबटूर से दो बार लोकसभा के लिए चुने गए थे।

उन्होंने यहां दो बार, 1998 और 1999 में जीत हासिल की। फ़रवरी 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया। झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्हें तेलंगाना के राज्यपाल और पुदुच्चेरी के उप राज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया थाl इसके बाद जुलाई 2024 में वे महाराष्ट्र के राज्यपाल बने।

राधाकृष्णन ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र आंदोलन से की थी।

2007 में, जब वे तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष थे, उन्होंने राज्य में 93 दिनों की 19,000 किलोमीटर लंबी ‘रथ यात्रा’ की थी। इस यात्रा में उन्होंने मुख्य रूप से नदी जोड़ो, आतंकवाद, समान नागरिक संहिता, अस्पृश्यता और नशे के दुष्परिणाम जैसे मुद्दों पर ध्यान आकर्षित किया।

इसके बाद भी उन्होंने बांधों और नदियों के मुद्दे पर 280 किलोमीटर और 230 किलोमीटर की दो यात्राएं निकाली थीं।

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