विवाह पंचमी आजः मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी पर हुआ था श्रीराम और सीता का विवाह

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है विवाह पंचमी|

आज पंचमी तिथि 10:57 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 11:57 PM तक उपरांत श्रवण | गण्ड योग 12:49 PM तक, उसके बाद वृद्धि योग | करण बव 10:13 AM तक, बाद बालव 10:57 PM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 02:55 PM – 04:15 PM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा |

आज (25 नवंबर) विवाह पंचमी है। मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पप विवाह पंचमी मनाई जाती है। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी तिथि पर भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह हुआ था। इस पर्व पर राम-सीता का विशेष पूजा करने की परंपरा है।

विवाह पंचमी के अवसर पर राम-सीता के मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं, व्रत रखते हैं। विवाह पंचमी पर ही गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपना ग्रंथ श्रीरामचरितमानस पूर्ण किया था। इस वजह से आज श्रीरामचरितमानस का पाठ खासतौर पर करना चाहिए। ऐसा करने से घर में प्रेम, सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आनंद बना रहता है।

विवाह पंचमी पर ऐसे करें श्रीराम-सीता पूजा

स्नान के बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।

घर के मंदिर में पूजा की चौकी तैयार करें। चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाकर राम दरबार यानी श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान जी, भरत-शत्रुघ्न की मूर्तियां या चित्र स्थापित करें।

भगवान की मूर्तियों पर पहले शुद्ध जल चढ़ाएं और फिर पंचामृत से अभिषेक करें। पंचामृत दूध, दही, घी, शहद और मिश्री से तैयार किया जाता है। पंचामृत के बाद पुनः स्वच्छ जल से स्नान कराएं।

अभिषेक के बाद श्रीराम-सीता की मूर्तियों को वस्त्र, फूल, हार और आभूषणों से सजाएं। राम जी को दूल्हे और माता सीता को दुल्हन की तरह सजाना चाहिए।

फल-फूल, नैवेद्य (गाय के दूध से बनी मिठाई), रोली, चावल, पुष्प, धूप-दीप आदि अर्पित करते हुए रां रामाय नमः मंत्र जप करें। मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर भगवान की आरती करें।

विवाह पंचमी पर श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी की भी विशेष पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि हनुमान जी के बिना श्रीराम की पूजा अधूरी मानी जाती है। हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए।

पूजा के अंत में जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। अन्य लोगों को भी प्रसाद बांटें।

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