सामूहिक प्रयास से ही जड़ से खत्म किया जा सकता है ‘नशा’ : जीवन चंद्र उप्रेती

देहरादून : योग एवं आध्यात्मिक गुरु, ऊर्जा उपचारक (एडवांस प्राणिक हिलर) जीवन चंद्र उप्रेती गढ़वाल मंडल भ्रमण पर पहुंचे। वे देहरादून, श्रीनगर एवं अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में युवा वर्ग को, देवभूमि को नशा मुक्त करने और योग एवं अध्यात्म के महत्व पर चर्चा करेंगे। साथ ही समाज में प्रतिभाशाली छात्र एवं छात्राएं तथा अन्य जो अपवाद है, के सम्मान आयोजन में भाग लेंगे।

योग एवं आध्यात्मिक गुरु, ऊर्जा उपचारक (एडवांस प्राणिक हिलर) जीवन चंद्र उप्रेती ने कहा कि नशा न केवल युवाओं के भविष्य को प्रभावित करता है बल्कि, पूरे परिवार और समाज पर इसका नकारात्मक असर पड़ता है। बताया कि नशा उन्मूलन केवल सरकारी पहल नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। युवा पीढ़ी को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता ही सबसे प्रभावी हथियार है।

कहा कि नशा उन्मूलन पर वर्तमान में पूर्ण विश्व की आवश्यकता है, इसके होने वाले शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दुष्परिणामों को नकारा नहीं जा सकता है। इसके प्रभाव से समस्त विश्व प्रभाव में है, इसीलिए नशा उन्मूलन के निरंतर विश्व स्तरीय प्रयास किए जा रहे है।

सामाजिक स्तर भी अनेकों संगठन इस मुहिम में लगे हुए है। इतने प्रयासों के पश्चात भी स्थिति में पर्याप्त सुधार नहीं दिख रहा है। इसका मूल कारण हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे है, हमारी नैतिकता का स्तर घट जा रहा है। ऐसी स्थिति में हमे आत्म चिंतन करना होगा, योग एवं अध्यात्म का सहारा लेना हिंगा। नवयुवकों की रुचि इस ओर बढ़ने के लिए स्कूलों में छात्र एवं छात्राओं को तथा समाज की जागरू करना होगा। अन्यथा व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र क्षतिग्रस्त होता जाएगा। आइए इस समस्या का समाधान शासन एवं समाज को मिलकर करना होगा। साथ ही आदर्श राजनीति एवं सुव्यवस्था स्थापित करने पर भी चर्चा करनी होगी।

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