पंचांग : आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा और भगवान दत्तात्रेय का प्रकट उत्सव

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |आज है पूर्णिमा व्रत, पूर्णिमा, मार्गशीर्ष पूर्णिमा, सत्य व्रत, अन्नपूर्णा जयंती है|

आज चतुर्दशी तिथि 08:37 AM तक उपरांत पूर्णिमा तिथि 04:43 AM तक उपरांत प्रतिपदा | नक्षत्र कृत्तिका 02:54 PM तक उपरांत रोहिणी | शिव योग 12:34 PM तक, उसके बाद सिद्ध योग | करण वणिज 08:38 AM तक, बाद विष्टि 06:41 PM तक, बाद बव 04:44 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 01:36 PM – 02:56 PM है | आज चन्द्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा |

आज गुरुवार, 4 दिसंबर को अगहन (मार्गशीर्ष) मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर भगवान दत्तात्रेय का प्रकट उत्सव भी मनाया जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य और भगवान विष्णु, दत्तात्रेय का पूजन करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से उतना पुण्य मिलता है, जितना पुण्य यज्ञ करने से मिलता है।

मार्गशीर्ष मास में भगवान श्रीकृष्ण की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि द्वापर युग श्रीकृष्ण ने मार्गशीर्ष मास को खुद का स्वरूप बताया था। इसका जिक्र महाभारत, श्रीमद्भगवद् गीता में है। इस दिन तीर्थ या किसी पवित्र नदी में स्नान करके दान करने से जाने-अनजाने में किए गए पापों का नाश होता है। इस महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर गीता जयंती मनाई जाती है, इसलिए पूर्णिमा पर गीता का पाठ भी करना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *