सरस्वती शिशु मंदिर के छात्रों ने जाना स्वामी रामतीर्थ का जीवन दर्शन

चम्बा: युवा वर्ग को महापुरुषों का अनुसरण करना चाहिए। स्वामी रामतीर्थ के साहित्य को पढ़कर व्यक्ति अपने को आदर्श बना सकता है। यह बातें सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित स्वामी रामतीर्थ वेदांत सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कही।

स्वामी रामतीर्थ फाउंडेशन की पहल पर सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित महान गणितज्ञ स्वामी रामतीर्थ वेदांत सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि संत स्वामी रामतीर्थ और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने समाज को एक दिशा दी। कार्यकम में श्रीदेव सुमन विवि के कुलसचिव दिनेश चंद्रा ने कहा कि स्वामी रामतीर्थ आदर्श गणितज्ञ, देशभक्त, समाज सुधारक और महान संत थे। स्वामी रामतीर्थ ने समाज में राष्ट्रप्रेम और अध्यात्म की अलख जगाई। उन्होंने विदेशों में जाकर भारतीय संस्कृति और अध्यात्मवाद का शंखनाद किया और विदेशियों को इसके प्रति आकृष्ट किया। स्वामी रामतीर्थ के व्याख्यानों से पश्चिमी जगत में भारत के प्रति सम्मान बढ़ा एवं वेदांत दर्शन के प्रति स्था बढ़ी। स्वामी रामतीर्थ परिसर के जंतु विज्ञान विभाग के संकाय अध्यक्ष प्रो एनके अग्रवाल ने कहा कि स्वामी रामतीथ्र देशभक्ति और समाज सेवा के प्रकाश पुंज थे। उनके रोम-रोम में राष्ट्रीयता की भावना तरंगित होती रहती थी। प्रधानाचार्य पूर्ण सिंह रावत ने कहा कि स्वामी रामतीर्थ ने देश भक्ति को ईश भक्ति का महत्वपूर्ण चरण बताया। उनका मानना था कि जो देश भक्त नहीं है, वह ईश भक्ति क्या करेगा? भारतीय समाज के जागरूक प्रहरी स्वामी रामतीर्थ ने संपूर्ण मानव जाति को देशप्रेम की भावना, समाजवादी विचारधारा, नारी उत्थान आदि भावनाओं से परिचित कराया। मनोहर लाल रतूड़ी ने कहा कि आज युवाओं को ऐसे महापुरुषों के विचार दर्शन और आदर्शों पर चलकर उनसे सीख लेने की जरूरत है।
इस मौके पर ओम प्रकाश कोठारी, प्यार सिंह भंडारी, कमला चमोली, यशोदा तोमर, ममता चौहान, निर्मला रौथाण, वर्षा सुयाल, मनीषा पंत, ममता ममगाई आदि उपस्थित रहे।

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