हिमशिखर धर्म डेस्क
देवों के देव महादेव का प्रिय सावन का महीना 16 जुलाई से शुरू हो रहा है। इस बार सावन में चार सोमवार आएंगे। 22 जुलाई मंगलवार को प्रदोष व्रत का दुर्लभ संयोग बन रहा है। वहीं 29 जुलाई को शिववास योग में नाग पंचमी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव के पूजन-अर्चना से भोले बाबा की कृपा बरसती है। हालांकि, मैदानी इलाकों में 11 जुलाई से सावन शुरू हो चुका है, ऐसे में वहां पर पहला सोमवार आज 14 जुलाई को है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सावन भगवान शंकर का महीना माना जाता है। शिव का अर्थ कल्याण है। कहा जाता है कि कण-कण में भगवान शिव का वास है। वेदों में उनका साकार और निराकार का वर्णन किया गया है। भगवान शिव क्षण में ही पसीज कर भक्तों को अभय प्रदान करते हैं। सावन का महीना 16 जुलाई से शुरू हो रहा है। सावन में सोमवार को भगवान शिव की पूजा अत्यधिक फलदायी मानी जाती है। सावन शुरू होते ही जगह-जगह बोल बम के नारे गूंजने लगते हैं। इस बार सावन में कुल चार सोमवार का संयोग बन रहा है। इसमें 21 जुलाई, 28 जुलाई, 4 अगस्त और 11 अगस्त को सावन का आखिरी सोमवार पड़ेगा। मंगलवार 22 जुलाई को आ रहे प्रदोष व्रत के साथ अमृत सर्वार्थ सिद्धि का विशेष योग बन रहा है। 29 जुलाई को मंगलवार के दिन आ रही नाग पंचमी का फल भी शुभदायक है। सावन की शिवरात्रि 23 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी। वहीं, मैदानी क्षेत्र में 11 जुलाई से सावन शुरू हो गया है.
पहाड़ व मैदान में सावन के अंतर का कारण
पर्वतीय क्षेत्र के लोग संक्रांति से संक्रांति तक सावन मनाते हैं, संक्रांति 16 जुलाई से शुरु हो रही है। जबकि मैदानी क्षेत्रों में पूर्णिमा से पूर्णिमा तक सावन मनाया जाता है। 10 जुलाई को पूर्णिमा थी, ऐसे में मैदानी क्षेत्रों में पहला सोमवार आज 14 जुलाई से शुरु है। जबकि पर्वतीय सोमवार 21 जुलाई को होगा