आज का पंचांग : शक्ति पर भक्ति की विजय

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

पञ्चाङ्ग
तिथिपूर्णिमा – 05:07 पी एम तकनक्षत्रमघा – 07:31 ए एम तक
प्रतिपदापूर्वाफाल्गुनी
योगसुकर्मा – 10:25 ए एम तककरणबव – 05:07 पी एम तक
धृतिबालव – 04:54 ए एम, मार्च 04 तक
वारमंगलवारकौलव
पक्षशुक्ल पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
विक्रम सम्वत2082 कालयुक्तबृहस्पति संवत्सरकालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक
शक सम्वत1947 विश्वावसुसिद्धार्थी
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासफाल्गुन – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते19फाल्गुन – अमान्त
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिसिंहनक्षत्र पदमघा – 07:31 ए एम तक
सूर्य राशिकुम्भपूर्वाफाल्गुनी – 01:30 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रशतभिषापूर्वाफाल्गुनी – 07:31 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदशतभिषापूर्वाफाल्गुनी – 01:34 ए एम, मार्च 04 तक
  पूर्वाफाल्गुनी
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान11 घण्टे 38 मिनट्स 50 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान12 घण्टे 20 मिनट्स 08 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:44 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:16 ए एम से 06:05 ए एमप्रातः सन्ध्या05:41 ए एम से 06:55 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:21 पी एम से 01:08 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:27 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:31 पी एम से 06:56 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:34 पी एम से 07:48 पी एम
अमृत काल01:13 ए एम, मार्च 04 से 02:49 ए एम, मार्च 04निशिता मुहूर्त12:19 ए एम, मार्च 04 से 01:08 ए एम, मार्च 04

आज का भगवद् चिंतन
शक्ति पर भक्ति की विजय

जीवन में जो भी कार्य उन प्रभु के विश्वास के बल पर किया जाता है, कठिन से कठिन होने पर भी प्रभु द्वारा अवश्य ही पूर्ण भी कर दिया जाता है। ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं पूर्ण शरणागति के पावन पर्व का नाम ही होलिका दहन है। जिस अनुपात में हमारे भीतर प्रभु के प्रति समर्पण भाव होगा उसी अनुपात में हमारा जीवन निर्भय एवं आनंदमय भी बना रहेगा। जीवन में प्रभु शरणागति होगी तो विपदा की धधकती ज्वालाओं के मध्य भी आप सुरक्षित एवं प्रसन्नचित्त बने रहेंगे।

होलिका दहन का पर्व यही सीख प्रदान करता है, कि भक्त का अनिष्ट करने वाले का अस्तित्व ही नष्ट हो जाता है। साधु पुरुषों के प्रति रखा गया द्वेष भाव जीवन में विपत्ति का कारक बन जाता है। अपने प्रति निष्ठावान व्यक्ति के जीवन से दुर्मति रूपी होलिका का दहन प्रभु स्वयं करते हैं व अपने शरणागत की झोली प्रसन्नताओं से भी भर देते हैं। होलिका दहन का पर्व मानवमात्र को यही सीख प्रदान करता है, कि विजय शक्ति की नहीं, भक्ति की होती है।

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