
पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज यानी कि 17 अगस्त को घी संक्रांति मनाई जा रही है। उत्तराखंड का ये प्रसिद्ध लोकपर्व है। संक्रांति को सिंह संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। आज सूर्य देव सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। इसलिए आज सिंह संक्रांति मनाई जा रही है। भादो के आगमन पर खेती और पशुपालन से यह घी त्यार विशेष पर्व माना जाता है।
उत्तराखंड में माह का प्रत्येक एक दिन यानी संक्रांति को लोक उत्सव के रूप में मनाने की प्रथा है। भाद्रपद (भादो) मास की संक्रांति, जिसे सिंह संक्रांति भी कहा जाता है। इस दिन सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करता है इसलिए इसे सिंह संक्रांति भी कहा जाता है।

अच्छी फसल की कामना
घी त्यार अंकुरित फसल बोने के बाद मनाया जाने वाला त्योहार है। यह खेती और पशुपालन से जुड़ा एक ऐसा लोकपर्व है। यही वह समय है जब वर्षा के मौसम में उगाई जाने वाली फसलों में अंकुर आना शुरू हो जाते हैं। इसलिए किसान अच्छी फसल की कामना करके जश्न मनाते हैं।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष नवमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण|
आज नवमी तिथि 07:24 PM तक उपरांत दशमी | नक्षत्र रोहिणी 03:17 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा | व्याघात योग 01:40 AM तक, उसके बाद हर्षण योग | करण तैतिल 08:29 AM तक, बाद गर 07:24 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 04:18 PM – 06:00 PM है | आज चन्द्रमा वृषभ राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – श्रावण
तिथि
- कृष्ण पक्ष नवमी – Aug 16 09:34 PM – Aug 17 07:24 PM
- कृष्ण पक्ष दशमी – Aug 17 07:24 PM – Aug 18 05:22 PM
नक्षत्र
- रोहिणी – Aug 17 04:38 AM – Aug 18 03:17 AM
- म्रृगशीर्षा – Aug 18 03:17 AM – Aug 19 02:06 AM
स्वास्थ्य, एकाग्रता, समय प्रबंधन से सफलता मिलेगी
जी तोड़ मेहनत करने में कभी पीछे मत हटिएगा। कड़ा परिश्रम आपको इस बात के लिए प्रेरित करेगा कि जिंदगी में यदि कोई बड़ा जोखिम उठाना हो, तो आप उठा लेंगे। तीन बातों को साधिए तो कड़ा परिश्रम तकलीफ नहीं पहुंचाएगा। स्वास्थ्य, एकाग्रता और समय प्रबंधन। क्योंकि कड़े परिश्रम के बाद यदि परिणाम अनुकूल नहीं मिलता है, तो लोग और टूट जाते हैं।
यदि आपने स्वास्थ्य, समय और एकाग्रता साधी है, तो अचानक हुई कोई घटना या प्रतिकूल परिणाम में आप अपने आपको आश्वस्त कर सकेंगे। समुद्र मंथन में निकलना था अमृत, पर सबसे पहले निकला विष। जो सोचा वैसा नहीं हुआ, तब क्या करें।
देवताओं ने समझदारी दिखाई और विष्णु जी के पास पहुंच गए, उन्होंने शंकर जी के पास भेजा, विष शंकर जी ने पिया, और फिर अमृत निकालने की तैयारी हो गई। यह घटना हमें समझाती है कि कड़ा परिश्रम करने के बाद अनुकूल परिणाम नहीं मिलें, तो थक मत जाइएगा, ईश्वरीय शक्ति पर भरोसा जरूर रखिएगा, वो कोई न कोई रास्ता निकाल देगी।
