पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष द्वितीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है सोमवार व्रत और वराह जयंती
आज द्वितीया तिथि 12:35 PM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र उत्तर फाल्गुनी 03:49 AM तक उपरांत हस्त | सिद्ध योग 12:06 PM तक, उसके बाद साध्य योग | करण कौलव 12:35 PM तक, बाद तैतिल 01:11 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 07:45 AM – 09:19 AM है | आज 08:28 AM तक चन्द्रमा सिंह उपरांत कन्या राशि पर संचार करेगा
सहजता से सोएं-जागें और ये दोनों काम समय पर हों
आज बच्चा का माता-पिता डाट-डपटकर, पुचकारकर सुलाते हैं। और बच्चों को उठाने के दृश्य तो निराले ही हो गए हैं। सुबह-सुबह माता-पिता को पूरी ताकत झोंकनी पड़ती है, तब जाकर नौनिहाल बिस्तर पर एक करवट लेते हैं।
यह जो झंझट है- सोने और उठने की, इसके परिणाम आगे आएंगे। नींद का प्राकृतिक चक्र आहत होता जा रहा है और इसका असर मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ेगा। 10-15 साल बाद इस पीढ़ी के भीतर जो चिड़चिड़ापन बढ़ जाएगा, उदासी उतरेगी, उसके पीछे नींद का भी योगदान होगा।
नींद के मामले में इंसान को समझ होनी चाहिए कि सहजता से सोएं-जागें और ये दोनों काम समय पर हों। वह समय प्रकृति की घड़ी से तय होगा। सूर्योदय के साथ उठें, भोजन के 2-3 घंटे बाद सोएं, और 7 से 8 घंटे की नींद लें। यह क्रिया अपने आप में औषधि है।
इसे ऋषि-मुनियों ने अपनी आत्मा के साथ सोना कहा है। हम या तो अपने शरीर के साथ सोते हैं या किसी और के, लेकिन यदि सोने से पहले योग करें और उठने के बाद छोटा-सा मेडिटेशन करें, तो समझ जाएंगे कि हम अपनी आत्मा के साथ भी सो सकते हैं।
आज का पंचांग
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – भाद्रपद
तिथि
- शुक्ल पक्ष द्वितीया – Aug 24 11:48 AM – Aug 25 12:35 PM
- शुक्ल पक्ष तृतीया – Aug 25 12:35 PM – Aug 26 01:54 PM
नक्षत्र
- उत्तर फाल्गुनी – Aug 25 02:05 AM – Aug 26 03:49 AM
- हस्त – Aug 26 03:49 AM – Aug 27 06:04 AM
भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती का पर्व मनाया जाता है। भगवान विष्णु ने इस दिन वराह अवतार लेकर हिरण्याक्ष नामक दैत्य का वध किया था। इस बार वराह जयंती आज सोमवार को है। वराह जयन्ती के अवसर पर भक्त लोग भगवान विष्णु का भजन-कीर्तन, उपवास एवं व्रत इत्यादि का पालन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
दूसरे के धन पर नजर रखने वाला हिरण्याक्ष
भगवान विष्णु का मत्स्य और कश्यप के बाद तीसरा अवतार है वराह। वराह यानी शुकर। इस अवतार के माध्यम से मानव शरीर के साथ परमात्मा का पहला कदम धरती पर पड़ा। मुख शुकर का था, लेकिन शरीर इंसानी था। उस समय हिरण्याक्ष नामक दैत्य ने अपनी शक्ति से स्वर्ग पर कब्जा कर पूरी पृथ्वी को अपने अधीन कर लिया था। हिरण्याक्ष का अर्थ है हिरण्य मतलब स्वर्ण और अक्ष मतलब आंखें। जिसकी आंखें दूसरे के धन पर लगी रहती हों, वो हिरण्याक्ष है।
वराह अवतार से जुड़ी कथा इस प्रकार है
पुरातन समय में दैत्य हिरण्याक्ष ने जब पृथ्वी को ले जाकर समुद्र में छिपा दिया तब ब्रह्मा की नाक से भगवान विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए। भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर सभी देवताओं व ऋषि-मुनियों ने उनकी स्तुति की। सबके आग्रह पर भगवान वराह ने पृथ्वी को ढूंढना प्रारंभ किया। अपनी थूथनी की सहायता से उन्होंने पृथ्वी का पता लगा लिया और समुद्र के अंदर जाकर अपने दांतों पर रखकर वे पृथ्वी को बाहर ले आए। जब हिरण्याक्ष दैत्य ने यह देखा तो उसने भगवान विष्णु के वराह रूप को युद्ध के लिए ललकारा। दोनों में भीषण युद्ध हुआ। अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर दिया। इसके बाद भगवान वराह ने अपने खुरों से जल को स्तंभित कर उस पर पृथ्वी को स्थापित कर दिया। इसके पश्चात भगवान वराह अंतर्धान हो गए।