नवरात्र का पांचवा दिन आज: ऐसे करें मां स्कंदमाता की पूजा, इस चीज का लगाएं भोग

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आज आश्विन शुक्ल पक्ष पंचमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |

आज पंचमी तिथि 12:04 PM तक उपरांत षष्ठी | नक्षत्र अनुराधा 01:08 AM तक उपरांत ज्येष्ठा | प्रीति योग 11:45 PM तक, उसके बाद आयुष्मान योग | करण बालव 12:04 PM तक, बाद कौलव 01:17 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:48 AM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

नवरात्रि के पांचवें दिन स्‍कंदमाता की पूजा की जाती है। मां दुर्गा का पांचवा रूप स्‍कंदमाता कहलाता है। प्रेम और ममता की मूर्ति स्‍कंदमाता की पूजा करने से मनोकामना पूर्ण होती है और मां आपके बच्‍चों को दीर्घायु प्रदान करती हैं। भगवती पुराण में स्‍कंदमाता को लेकर ऐसा कहा गया है कि नवरात्र के पांचवें दिन स्‍कंद माता की पूजा करने से ज्ञान और शुभ फलों की प्राप्ति होती है। मां ज्ञान, इच्‍छाशक्ति, और कर्म का मिश्रण हैं। जब शिव तत्‍व का शक्ति के साथ मिलन होता है तो स्‍कंद यानी कि कार्तिकेय का जन्‍म होता है। आइए जानते हैं स्‍कंदमाता की पूजाविधि, आरती और भोग।

इसलिए कहलाईं स्‍कंदमाता
नवरात्रि की पांचवीं देवी को स्‍कंदमाता कहा जाता है। भगवान शिव की अर्द्धांगिनी के रूप में मां ने स्‍वामी कार्तिकेय को जन्‍म दिया था। स्‍वामी कार्तिकेय का दूसरा नाम स्‍कंद है, इसलिए मां दुर्गा के इस रूप को स्‍कंदमाता कहा गया है। जो कि प्रेम और वात्‍सल्‍य की मूर्ति हैं।

स्‍कंदमाता का भोग
स्‍कंदमाता को पीले रंग की वस्‍तुएं सबसे प्रिय हैं। इसलिए उनके भोग में पीले फल और पीली मिठाई अर्पित की जाती है। आप इस दिन केसर की खीर का भोग भी मां के लिए बना सकते हैं। विद्या और बल के लिए मां को 5 हरी इलाइची अर्पित करें और साथ में लौंग का एक जोड़ा भी चढ़ाएं।

आज का भगवद् चिन्तन
नारी ही नारायणी

एक नारी का वह रूप जिसमें अन्याय के प्रतिकार करने की सामर्थ्य हो, जिसमें दुष्टों को दण्डित करने की सामर्थ्य हो, जिसमें अधर्म और असत्य को कुचलने की सामर्थ्य हो और जिसमें स्वयं धर्म पथ का अनुगमन कर दूसरों को धर्म मार्ग पर चलाने की सामर्थ्य हो वही “दुर्गा” है। दुर्गा केवल दुर्गति या दुर्मति का नाश ही नहीं करती है अपितु दुर्जनों के संहार करने का सामर्थ्य भी रखती है।

किसी नारी का अपनी वास्तविक शक्ति से परिपूर्ण रूप ही तो दुर्गा है। एक नारी जब समाज में सर्व मंगल और सर्व सुख की भावना से अन्याय और असत्य को कुचलने के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन करती है तो उसका जीवन वंदनीय अवश्य बन जाता है। जिस दिन नारी द्वारा अपने वास्तविक स्वरूप को समझ लिया जायेगा उसके भीतर की दुर्गा भी अवश्य प्रकट हो जायेगी। नवरात्रि के पंचम दिवस में आज माँ स्कंदमाता को वंदन करते हैं।

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