आज का पंचांग : जीवन के दो पहलू

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है। वैदिक पंचांग के अनुसार, शुक्रवार 21 फरवरी यानी आज जानकी जयंती है। यह पर्व हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर मां जानकी और भगवान श्रीराम की भक्ति भाव से पूजा की जा रही है। साथ ही जानकी जयंती का व्रत रखा जा रहा है। इस व्रत को करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है।

बुधवार, 26 फरवरी को शिव पूजा का महापर्व महाशिवरात्रि है। इस पर्व पर शिवलिंग का विशेष अभिषेक करने की परंपरा है। अगर भक्त शिवरात्रि पर विधिवत पूजा नहीं कर पा रहा है तो वह जल और बिल्वपत्र चढ़ाकर भी शिव जी की सामान्य पूजा कर सकता है। ऐसा करने से शिव जी की कृपा प्राप्त की जा सकती है। ऐसी मान्यता है। शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने का महत्व बहुत अधिक है। माना जाता है कि अगर कोई भक्त शिवलिंग पर सिर्फ बिल्व पत्र ही चढ़ा देता है तो भी उसे शिव कृपा मिल सकती है। बिल्व पत्र ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जप करते हुए चढ़ानी चाहिए।

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इस योग में भगवान श्रीराम और मां जानकी की पूजा करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। आइए, पंडित उदय शंकर भट्ट जी से जानते हैं आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त के विषय में।

आज का पंचांग


सूर्योदय – सुबह 06 बजकर 54 मिनट पर
सूर्यास्त – शाम 06 बजकर 16 मिनट पर
ब्रह्म मुहूर्त – सुबह 05 बजकर 13 मिनट से 06 बजकर 03 मिनट तक
विजय मुहूर्त – दोपहर 02 बजकर 28 मिनट से 03 बजकर 14 मिनट तक
गोधूलि मुहूर्त – शाम 06 बजकर 13 मिनट से 06 बजकर 39 मिनट तक
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से रात 01 बजे तक
राहुकाल – सुबह 11 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 35 मिनट तक
गुलिक काल – सुबह 08 बजकर 19 मिनट से 09 बजकर 44 मिनट तक
दिशा शूल – पश्चिम

आज का भगवद् चिन्तन

जीवन के दो पहलू

इस संपूर्ण प्रकृति में विसर्जन के साथ ही सृजन भी जुड़ा हुआ है। हमारे दुःखों का एक प्रमुख कारण यह भी है कि हम केवल जीवन के एक पक्ष को ही देखते हैं। हम जीवन को सूर्यास्त की दृष्टि से तो देखते हैं पर सूर्योदय की दृष्टि से नहीं देख पाते। पतझड़ होता है तो तभी वृक्षों पर हरी कोंपलें फूटती हैं और वह पुष्पित व फलित होता है।

परमात्मा से शिकायत मत किया करो क्योंकि वो हमसे बेहतर इस बात को जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा हो सकता है। उस ईश्वर ने आपकी झोली खाली की है तो चिंता मत करना क्योंकि शायद वह पहले से कुछ बेहतर उसमें डालना चाहते हों। इस प्रकृति में वृक्षों पर पतझड़ होता है ताकि हरियाली छा सके एवं अंधकार होता है ताकि अरूणोदय की लालिमा का आनंद हम सबको प्राप्त हो सके।

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