पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
आश्विन शुक्ल पक्ष द्वितीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, आश्विन |आज द्वितीया तिथि 04:51 AM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र हस्त 01:40 PM तक उपरांत चित्रा | ब्रह्म योग 08:22 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग | करण बालव 03:51 PM तक, बाद कौलव 04:52 AM तक, बाद तैतिल | आज राहु काल का समय 03:18 PM – 04:48 PM है | आज 02:56 AM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा |
आज का विचार
जितना बड़ा वृक्ष होगा उसके बीज के अंकुरित होने की यात्रा भी उतनी ही लम्बी होगी। ठीक उसी प्रकार जीवन के शुभ संकल्प जितने श्रेष्ठ होंगे उनको साकार रूप लेने में उतना ही समय लगेगा.!!
आज का भगवद् चिन्तन
माँ ब्रह्मचारिणी नमोऽस्तुते
जीवनदायिनी शक्ति की पूजा का पर्व ही नवरात्रि है। नवरात्रि के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। नवरात्रि का दूसरा दिवस माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। शक्ति ही जीवन और जगत का आधार है। शक्ति के बिना जीवन अधूरा और निष्प्राण हो जाता है।
ब्रह्मचारिणी अर्थात ब्रह्म को भी चारण अर्थात् अनुशासित करने वाली शक्ति। ब्रह्म चारिणी का दूसरा अर्थ है जो ब्रह्म में ही विचरण करे जो स्वयं ही ब्रह्म स्वरुप हो जाए। माँ ब्रह्मचारिणी अति सौम्य, सरल, सदा प्रसन्न रहने वाली और कभी भी क्रोध ना करने वाली देवी हैं।
जिस जीवन में विनम्रता, सहजता और पवित्रता होगी, वहाँ ब्रह्म स्वयं आते हैं। क्रोध जीवन की ऊर्जा का ह्रास करता है। क्रोध भय, अशांति व विषाद देता है। क्रोध से अपने लोग भी एक दिन पराये हो जाते हैं। परम शांति स्वरूपा होने के कारण ही देवी ब्रह्मचारिणी शक्ति संपन्न होकर सबको नियंत्रित कर रही हैं।