पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है। आज अनंत चतुर्दशी है, अनंत चतुर्दशी का व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन रखा जाता है।
भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है अनंत चतुर्दशी है, अनंत चतुर्दशी का व्रत भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन रखा जाता है। यह एक आध्यात्मिक संगम का दिन होता है, जिसमें भक्त भगवान विष्णु और गणेश जी दोनों की पूजा में समर्पित होते हैं।
इस दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा करने से जीवन की सभी बाधाएं समाप्त हो जाती हैं और भक्त को अनंत सुख, समृद्धि, और शांति का वरदान प्राप्त होता है। यह पर्व भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त करने का एक दिव्य अवसर है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ यदि कोई व्यक्ति श्री विष्णु सहस्त्रनाम स्तोत्र का पाठ करता है, तो उसकी मनोकामना पूर्ण होती है। धन-धान्य, सुख-संपदा आदि की कामना से यह व्रत किया जाता है।
आज चतुर्दशी तिथि 01:41 AM तक उपरांत पूर्णिमा | नक्षत्र धनिष्ठा 10:55 PM तक उपरांत शतभिषा | अतिगण्ड योग 11:51 AM तक, उसके बाद सुकर्मा योग | करण गर 02:31 PM तक, बाद वणिज 01:41 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:52 AM है | आज 11:21 AM तक चन्द्रमा मकर उपरांत कुंभ राशि पर संचार करेगा |
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – भाद्रपद
- अमांत – भाद्रपद
तिथि
- शुक्ल पक्ष चतुर्दशी – Sep 06 03:13 AM – Sep 07 01:41 AM
- शुक्ल पक्ष पूर्णिमा – Sep 07 01:41 AM – Sep 07 11:38 PM
नक्षत्र
- धनिष्ठा – Sep 05 11:38 PM – Sep 06 10:55 PM
- शतभिषा – Sep 06 10:55 PM – Sep 07 09:41 PM
आज स्नान के बाद मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा करें। गणेश जी को जल-दूध और पंचामृत छिड़कें। इसके बाद जनेऊ पहनाएं। अबीर, गुलाल, चंदन, सिंदूर, इत्र आदि चढ़ाएं। चावल चढ़ाएं।
गणेश मंत्र बोलते हुए दूर्वा की 21 गांठें भगवान को चढ़ाएं। लड्डुओं का भोग लगाएं। कर्पूर जलाएं और आरती करें। पूजा के अंत में भगवान से जानी-अनजानी गलतियों के लिए क्षमा याचना करें। प्रसाद बांटें और खुद भी लें।
गणेश जी के सूत्र जीवन में उतारने के संकल्प लें
गणेश पूजा के साथ ही भगवान के जीवन प्रबंधन सूत्र जीवन में उतारने का संकल्प लें। इन सूत्रों को जीवन में उतार लेंगे तो जीवन की सभी परेशानियों से मुक्ति मिल सकती है। गणेश जी बुद्धि के देवता माने गए हैं। गणेश जी की शारीरिक संरचना से जानें, भगवान हमें जीवन प्रबंधन के कौन-कौन से सूत्र बताते हैं…
बड़ा सिर – गणेश जी का सिर हमें संदेश देता है कि हमेशा अपनी सोच बड़ी रखनी चाहिए। जब हम बड़ा सोचेंगे तब ही बड़ा काम कर पाएंगे।
बड़े कान- भगवान के बड़े कान बताते हैं कि हमें सभी की बातें बहुत ध्यान से सुननी चाहिए। हाथी जैसे बड़े कान सूप के समान हैं। जिस तरह सूप छिलके बाहर फेंककर सिर्फ अन्न को अपने पास रखता है। ठीक इसी तरह हमें भी सभी की बातें सुननी चाहिए और उन बातों में से जो बात हमारे काम की है, उसे अपने जीवन में उतारना चाहिए।
छोटी आंखें- गणेश जी की छोटी आंखें बताती हैं कि हमें छोटी-छोटी बातों पर नजर रखनी चाहिए, अपने आसपास एक भी जरूरी बात नजरअंदाज नहीं होनी चाहिए।
सूंड– भगवान की सूंड दूर तक सूंघने में सक्षम होती है। जो उनकी दूरदर्शिता को प्रदर्शित करती है। इसका अर्थ ये है कि भगवान को हर बात की जानकारी है और वे भविष्य को ध्यान में रखकर काम करते हैं। हमें सभी बातों को गहराई से महसूस करना चाहिए और दूरदर्शिता के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
एक टूटा दांत- गणेश जी का एक दांत पूरा है और दूसरा टूटा हुआ है। टूटा दांत हमें बताता है कि अगर हमारे पास की चीज का अभाव है तो उसकी वजह से निराश नहीं होना चाहिए। अपूर्णता को भी स्वीकार करें और उसके बिना भी प्रसन्न रहें।
बड़ा पेट- भगवान का बड़ा पेट ये संदेश देता है कि हमें अच्छी-बुरी हर तरह की बात को पचा लेना चाहिए। बातों को इधर-उधर नहीं करना चाहिए।
छोटे पैर- गणेशजी के छोटे पैरों का संदेश है कि हमें धैर्य बनाए रखना चाहिए। जल्दबाजी में कोई काम नहीं करना चाहिए।
लड्डू – छोटी-छोटी बंदियों से मिलकर लड्डू बनता है। ये हमें एकता बनाए रखने का संकेत देता है।
अंकुश- गणेश जी का अंकुश बताता है कि हमें बुरी आदतों पर अंकुश लगाकर रखना चाहिए। क्रोध, लालच, अहंकार जैसी बुराइयों से बचना चाहिए।
कमल– गणेश जी के हाथ में कमल बताता है कि हमें कमल की तरह रहना चाहिए। कमल कीचड़ में खिलता है। बुरे लोगों के बीच में भी हमें अपनी अच्छाई नहीं छोड़नी चाहिए।