आज का पंचांग : ईर्ष्या से बचें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष द्वितीया, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |

आज द्वितीया तिथि 05:11 PM तक उपरांत तृतीया | नक्षत्र ज्येष्ठा 04:46 PM तक उपरांत मूल | सुकर्मा योग 11:29 AM तक, उसके बाद धृति योग | करण कौलव 05:11 PM तक, बाद तैतिल 06:20 AM तक, बाद गर | आज राहु काल का समय 09:31 AM – 10:52 AM है | आज 04:46 PM तक चन्द्रमा वृश्चिक उपरांत धनु राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – मार्गशीर्ष
  4. अमांत – मार्गशीर्ष

तिथि

  1. शुक्ल पक्ष द्वितीया   – Nov 21 02:47 PM – Nov 22 05:11 PM
  2. शुक्ल पक्ष तृतीया   – Nov 22 05:11 PM – Nov 23 07:25 PM

नक्षत्र

  1. ज्येष्ठा – Nov 21 01:55 PM – Nov 22 04:46 PM
  2. मूल – Nov 22 04:46 PM – Nov 23 07:27 PM

आज का भगवद् चिन्तन
ईर्ष्या से बचें

अपूर्णता मानव मन का स्वभाव है। कोई वस्तु हो, पदार्थ हो अथवा प्राणी जगत हो इस प्रकृति ने कुछ न कुछ विशिष्टता सबके भीतर प्रदान की है। प्रकृति कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करती है। यदि इस दुनिया में पूर्ण कोई भी नहीं तो सर्वथा अपूर्ण भी कोई नहीं है। अंतर केवल आपके दृष्टिकोण का है कि आप अपने जीवन के किस पहलू पर नजर रखते हैं। जो आपके पास नहीं है उस पर अथवा जो आपके पास है उस पर।

ये बात सत्य हो सकती है, कि जो सामने वाले के पास है वो आपके पास नहीं हो पर जीवन को दूसरी दृष्टि से देखने पर पता चलेगा कि जो आपके पास है वो सामने वाले के पास भी नहीं है। किसी की उपलब्धियों को देखकर ईर्ष्या करने से बचो क्योंकि ईर्ष्या की आग दूसरों को जलाए न जलाए पर स्वयं को अवश्य जलाती है। संतोष और ज्ञान रूपी जल से इसे और अधिक भड़कने से रोको ताकि आपके जीवन में खुशियाँ जलने से बच सकें। ईर्ष्या से बचना ही प्रसन्न रहने का मार्ग भी है।

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