पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, मार्गशीर्ष |
आज दशमी तिथि 09:29 PM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र उत्तरभाद्रपदा 01:10 AM तक उपरांत रेवती | वज्र योग 07:12 AM तक, उसके बाद सिद्धि योग 04:21 AM तक, उसके बाद व्यातीपात योग | करण तैतिल 10:28 AM तक, बाद गर 09:29 PM तक, बाद वणिज | आज राहु काल का समय 04:15 PM – 05:36 PM है | आज चन्द्रमा मीन राशि पर संचार करेगा |
रामकथा के एक और प्रमुख वक्ता हैं- काकभुशुंडि जी। ये कौवा हैं, और ये सुनकर ही पार्वती जी चकित हो गईं और उन्होंने शंकर जी से पूछा- एक कौवा रामकथा का वक्ता कैसे बन गया? शिव जी ने कहा- देवी, जिस पर्वत पर यह पक्षी रहता है, वहां माया रचित अनेक गुण, दोष, मोह, काम आदि अविवेक जो सारे जगत में छाए हुए हैं, उसके पास नहीं फटकते।
रहे ब्यापि समस्त जग माहीं, तेहि गिरि निकट कबहुं नहिं जाहीं। यानी पूरे जगत में दुर्गुण बसे हैं, पर इस जगह नहीं। क्योंकि वहां एक भक्त रहते हैं और भक्त जहां रहता है, वहां से दुर्गुण चले जाते हैं। हम अपने भीतर के भक्त को जाग्रत करें तो आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाएगा।
लिखा है माया रचित, तो यदि माया से बचना हो तो एक आसान तरीका है। निज प्रभुमय देखहिं जगत, केहि सन करहिं बिरोध। मानस में कहा है, सारे संसार को परमात्मामय देख लें तो किसी से भी विरोध मिट जाए और यहीं से दुर्गुण मिट जाएंगे। यदि काकभुशुंडि जी को यह उपलब्धि हो सकती है तो हमें क्यों नहीं?