पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

कार्तिक शुक्ल पक्ष चतुर्थी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, कार्तिक | आज है वरद चतुर्थी |
आज चतुर्थी तिथि 03:48 AM तक उपरांत पंचमी | नक्षत्र अनुराधा 07:51 AM तक उपरांत ज्येष्ठा | शोभन योग | करण वणिज 02:35 PM तक, बाद विष्टि 03:48 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 09:21 AM – 10:46 AM है | आज चन्द्रमा वृश्चिक राशि पर संचार करेगा |

- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – कार्तिक
- अमांत – कार्तिक
तिथि
- शुक्ल पक्ष चतुर्थी – Oct 25 01:19 AM – Oct 26 03:48 AM
- शुक्ल पक्ष पंचमी – Oct 26 03:48 AM – Oct 27 06:05 AM
नक्षत्र
- अनुराधा – Oct 24 04:51 AM – Oct 25 07:51 AM
- ज्येष्ठा – Oct 25 07:51 AM – Oct 26 10:46 AM
आज का भगवद् चिन्तन
श्रवण की सावधानी रखें
बुरा करना ही गलत नहीं है अपितु बुरा सुनना भी गलत है। जो लोग आपके सामने दूसरों की बुराई करते हैं, निश्चित ही वो लोग दूसरों से आपकी बुराई भी करते होंगे। किसी की बुराई सुनने से हमारे स्वयं के विचार भी दूषित हो जाते हैं। विचारों का प्रदूषण विज्ञान से नहीं अपितु स्वयं के अन्तः ज्ञान से ही मिटाया जा सकता है। विचारों का प्रदूषण फैलने का कारण हमारी वो आदतें हैं जिन्हें किसी की बुराई सुनने में रस आने लगता है।
बुराई को सुनना, बुराई को चुनना जैसा ही है क्योंकि जब हम बुराई सुनना पसंद करते हैं तो बुराई का प्रवेश हमारे जीवन में स्वतः होने लगता है। जो हम रोज सुनते हैं, देखते हैं, वही हम होने भी लग जाते हैं। उन लोगों से अवश्य ही सावधान रहने की आवश्यकता है, जो सदैव दूसरों की बुराई का बखान करते रहते हैं। दूसरों की बुराई सुनने की अपेक्षा स्वयं के जीवन से बुराई को मिटाने के लिए सदैव प्रयासरत रहें।
