आज का पंचांग : दरिद्र नहीं, समृद्ध बनें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

आश्विन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |आज है मास शिवरात्रि और प्रदोष व्रत|

आज त्रयोदशी तिथि 11:37 PM तक उपरांत चतुर्दशी | नक्षत्र आश्लेषा 07:05 AM तक उपरांत मघा | सिद्ध योग 08:41 PM तक, उसके बाद साध्य योग | करण गर 11:27 AM तक, बाद वणिज 11:37 PM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 10:30 AM – 12:20 PM है | आज 07:05 AM तक चन्द्रमा कर्क उपरांत सिंह राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आश्विन
  4. अमांत – भाद्रपद

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष त्रयोदशी   – Sep 18 11:24 PM – Sep 19 11:37 PM
  2. कृष्ण पक्ष चतुर्दशी   – Sep 19 11:37 PM – Sep 21 12:17 AM

नक्षत्र

  1. आश्लेषा – Sep 18 06:32 AM – Sep 19 07:05 AM
  2. मघा – Sep 19 07:05 AM – Sep 20 08:05 AM

आज का विचार

आपकी मनोवृति ही आपकी महानता को निर्धारित करती है। डर भगाने की बजाए अपने सपनों को साकार करने के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे.!

आज का भगवद् चिन्तन

दरिद्र नहीं, समृद्ध बनें

मनुष्य आवश्यकताओं से नहीं अपितु इच्छाओं से दरिद्र होता है। जब तक व्यक्ति के भीतर पाने की इच्छा शेष है, तब तक उसे दरिद्र ही समझना चाहिए। बाहर की समृद्धि पाने के बाद भी भीतर की रिक्तता जीवन में खिन्नता का प्रमुख कारण है। भीतर की समृद्धता ही हमारे जीवन को प्रसन्नता प्रदान करती है। जिस दिन मन में कुछ न पाने की इच्छा जग जाये सही अर्थों में उसी दिन हमारी दरिद्रता का नाश भी हो जाता है।

मनुष्य की असीमित इच्छाएं ही उसे दरिद्र बनाती हैं। भक्त सुदामा जी की निष्कामता ने ही उन्हें द्वारिकापुरी के सदृश भोग ऐश्वर्य प्रदान कर दिया। मानो कि भगवान ये कहना चाह रहे हों कि जिसकी अब और कोई इच्छा बाकी नहीं रही वो मेरे ही समान मेरे बराबर में बैठने का अधिकारी बन जाता है। किसी मनुष्य की निष्कामता अथवा कामना शून्यता ही उसे अबसे अधिक मूल्यवान, अनमोल और उस प्रभु का प्रिय बना देती है।

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