पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
पञ्चाङ्ग
| तिथि | अष्टमी – 04:19 ए एम, मार्च 12 तक | नक्षत्र | ज्येष्ठा – 10:00 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| नवमी | मूल | ||
| योग | वज्र – 09:12 ए एम तक | करण | बालव – 03:08 पी एम तक |
| सिद्धि | कौलव – 04:19 ए एम, मार्च 12 तक | ||
| वार | बुधवार | तैतिल | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 27 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृश्चिक – 10:00 पी एम तक | नक्षत्र पद | ज्येष्ठा – 08:33 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| धनु | ज्येष्ठा – 03:17 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | कुम्भ | ज्येष्ठा – 10:00 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद | मूल – 04:42 ए एम, मार्च 12 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद – 04:58 पी एम तक | मूल | |
| पूर्व भाद्रपद |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 51 मिनट्स 56 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 06 मिनट्स 57 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:42 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:09 ए एम से 05:58 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:33 ए एम से 06:46 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | कोई नहीं | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:28 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:36 पी एम से 07:00 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:38 पी एम से 07:51 पी एम |
| अमृत काल | 12:08 पी एम से 01:55 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:18 ए एम, मार्च 12 से 01:06 ए एम, मार्च 12 |
आज का चिंतन
जो व्यक्ति यह मानता है कि वह कुछ नहीं जानता, वास्तव में वही बुद्धिमान और दार्शनिक होता है। ऊपर से शांत और गंभीर दिखाई देने वाले लोग भीतर से अधिक तेजस्वी हुआ करते हैं। बाकी:- दूसरों की दुआएं लीजिए, क्योंकि जहां दवा काम नहीं करती, वहां दुआ ही आशा की किरण बनती है…
आज का भगवद् चिन्तन
मृगतृष्णा से भी बचें
इंद्रियों की बहिर्मुखता ही हमें संसार की मृगतृष्णा में भटका कर अनेक प्रकार से दुःखी और अशांत बनाये रखती हैं। जिस प्रकार पतंग उड़ाने वाला डोरी अपने हाथ में रखता है और पतंग उलझने पर तुरंत अपने पास खींच लेता है, उसी प्रकार संसार में रहते हुए भी इंद्रियों की डोर को अपनी मुट्ठी में रखने की कला हमें आनी ही चाहिए। कर्म करते समय संसार जैसा व्यवहार करो लेकिन भीतर के ज्ञान चक्षुओं को भी सदैव खुला रखो जिससे संसार की नश्वरता का बोध भी हमें होता रहे।
ज्ञान युक्त विचारों से कर्म करोगे तो कहीं उलझोगे ही नहीं। जब-जब मन विकारों से मुक्त होता जायेगा तब-तब बाहरी संसार भी हमें शांति का अनुभव करायेगा। जब तक हम केवल बाहरी वस्तुओं को बदलने में लगे रहेंगे तब तक जीवन में प्रसन्नतापूर्ण बदलाव नहीं आ पायेंगे। बदलाव केवल विचारों में नहीं अपितु हमारे आचरण में भी होना चाहिए। जो इंद्रियों को साध लेता है वही तो संसार में रहते हुए भी साधु हो जाता है।
🙏 जय श्री राधे कृष्ण 🙏