आज का पंचांग : क्या पापों का नाश किया जा सकता है ?

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

प्राय: पाप-पुण्य के सबंध में प्रश्न उठा करते हैं। जिस प्रकार सुबह के प्रकाश के लिए सूर्य को अंतरिक्ष का वक्ष चीरना होता है, इसी प्रकार पुण्य की महिमा से दीक्षित होने के निमित्त, संभवत: हर क्षण पाप की ज्वाला से पिघलने की जरूरत होती है। जीवन पुण्य के बिना संभव है, किंतु पाप की परछाई भी जीवन का स्पर्श करती है। समाज में रहकर हम परिवार को चलाने के लिए अनेक उद्यम करते हैं, किंतु कहां कितना पाप हो रहा है और कितना पुण्य, हम इसका लेखा-जोखा नहीं रखते। हमारा एकमात्र लक्ष्य धनार्जन होता है। यदि धन, झूठ और पाप से अर्जित है तो वह पेट में खप जाता है, किंतु पाप तो आपके पास संचित है। याद रहे पाप से अर्जित धन तो व्यय हो जाता है, लेकिन पाप व्यय नहीं होता।

यही बात पुण्य के संबंध में भी है। शास्त्र कहते हैं जीव मात्र ही भूल करता है। ऐसा कौन है जो इससे बचा हो? जो इससे पृथक है वह मनुष्य नहीं देवता है, किंतु जो पाप करके प्रायश्चित नहीं करता, वह दानव है। जब तक मनुष्य अज्ञानी है, तब तक पाप, वासना व असत्य आदि उसके हृदय में उपस्थित रहते हैं। इसलिए तत्व ज्ञान की प्राप्ति आवश्यक है। इसके अभाव में पाप वासना नहीं मिटती।

सनातन धर्म और अन्य धार्मिक ग्रंथों में पाप के कई स्तर बताए गए हैं। कुछ पाप जो अनजाने में या हल्की हानि पहुंचाते हुए किए जाते हैं, वो छोटे पाप में गिने जाते हैं और वे पाप जो जानबूझकर, किसी को गंभीर कष्ट देने या धर्म के विरुद्ध जाकर किए जाते हैं, वो बड़े पाप में गिने जाते हैं। लेकिन पाप करते समय लोग ये भूल जाते हैं कि पाप का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह है कि पाप चाहे छोटा हो या बड़ा, उसका फल अवश्य मिलता है।पाप अगर छोटे हों, तो उसका क्या प्रभाव होता है?
पाप छोटे हों और भले ही उस वक़्त आपको नुकसान ना पहुंचाए, लेकिन उस पाप के प्रभाव से धीरे-धीरे जीवन में नकारात्मकता बढ़ती है, मानसिक अशांति होती है और बार-बार पाप करने से मनुष्य बड़े पाप की ओर बढ़ने लगता है। जब किसी भक्त ने पूछा कि क्या पाप के घड़े का साईज अलग-अलग होता है और क्या छोटे पाप का प्रभाव कम होता है, पाप का घड़ा सभी के लिए समान होता है, इसका आकार अलग-अलग नहीं होता। किसी भी चीज़ की एक सीमा होती है। यदि आपने बहुत से पुण्य कर्म किए हैं और बीच-बीच में छोटे-मोटे पाप कर रहे हैं, तो आपके पुण्य कर्म आपको बचाते रहते हैं और यही कारण है कि उस वक्त आपके साथ कुछ बुरा नहीं हो रहा होता, तो आपको लगता है कि आपको पाप को परिणाम भुगतना नहीं पड़ रहा है। जबकि ऐसा नहीं है, बल्कि आप अपने सरंक्षित पुण्य कर्मों को समाप्त कर रहे होते हैं और जब आपके पुण्य समाप्त हो जाते हैं, तब आपके द्वारा किए गए पापों का फल अवश्य मिलता है। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि हम अपने कर्मों पर ध्यान दें और पापों से बचें, चाहे वो छोटे हो या बड़े हो।

अगर बड़े पापों की बात की जाए, तो जब कोई बड़ा पाप करता है, तो उसके परिणामस्वरूप उस व्यक्ति को उस पाप का इस जन्म या अगले जन्म में भारी दंड मिलता है। पाप बढ़ने से अगला जन्म निम्न योनि में हो सकता है। शास्त्रों में कहा गया है कि बड़े पापों का दंड मृत्यु के बाद भी भुगतना पड़ता है।

क्या पाप का प्रायश्चित संभव है?शास्त्रों के अनुसार पाप चाहे छोटा हो या बड़ा, उसका प्रायश्चित किया जा सकता है। भगवद गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि “जो सच्चे मन से पश्चाताप करता है और भक्ति मार्ग अपनाता है, उसके पाप नष्ट हो सकते हैं”। तपस्या, दान, सेवा और भगवद भक्ति से पापों का नाश किया जा सकता है।

आज का विचार

हर एक व्यक्ति से सीखों क्योंकि हर कोई, सब कुछ नहीं जानता, लेकिन हर एक व्यक्ति कुछ न कुछ अवश्य जानता है.

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