पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
आज (8 मार्च) अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है। इस अवसर पर जानिए रामायण-महाभारत की खास महिलाओं के बारे में, जिनसे हम सुखी जीवन के सूत्र सीख सकते हैं। इस ग्रंथ में बताया गया है कि महिलाओं का अपमान करने वाला व्यक्ति कितना भी ताकतवर हो, वह बर्बाद हो जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः, यानी जिन घरों में महिलाओं का सम्मान होता है, वहां सभी देवी-देवताओं का वास होता है। जानिए ग्रंथों की खास महिलाओं से बारे में और उनसे हम कौन सी बात सीख सकते हैं…
अनसूइयाः सतीत्व से महिला की होती है पूजा
रामायण में राम, सीता और लक्ष्मण का वनवास काल चल रहा था, इस दौरान एक दिन वे अत्रि मुनि के आश्रम पहुंचे। आश्रम में अत्रि मुनि की पत्नी अनसूइया ने सीता को स्त्री धर्म समझाया। अनसूइया को उनके सतीत्व की वजह से पूजनीय माना गया है। अनसूइया ने संदेश दिया है कि स्त्री अपने सतीत्व की शक्ति से पूजनीय बन सकती है।
सीताः मुश्किल समय में भी पति का साथ न छोड़ें
रामायण में कैकयी ने राजा दशरथ से दो वर मांगे थे-पहला भरत को राज और राम को 14 वर्ष का वनवास। वनवास सिर्फ राम को जाना था, लेकिन अपने पतिव्रत धर्म को निभाने के लिए देवी सीता ने भी वनवास जाने की इच्छा बताई। राम और कौशल्या ने सीता को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन सीता अपने पति का साथ देने की बात पर टिकी रहीं। देवी सीता ने संदेश दिया है कि मुश्किल समय में भी जीवन साथी का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
मंदोदरी: जीवन साथी की गलतियों पर उसे समझाएं
मंदोदरी रावण की पत्नी थीं। मंदोदरी हमेशा रावण की भलाई चाहती थीं। इसलिए सीता हरण के बाद मंदोदरी ने रावण को समझाने की बहुत कोशिश की। उसने कई बार रावण से कहा कि वह सीता को लौटा दें, लेकिन अहंकार की वजह से रावण ने मंदोदरी की बातें नहीं मानी और उसका अंत हो गया। मंदोदरी और रावण के जीवन से सीख लेनी चाहिए कि जीवन साथी की सही सलाह तुरंत मान लेनी चाहिए, वर्ना सबकुछ खत्म हो सकता है। जीवन साथी अगर कोई गलती करता है, तो उस समझाने की कोशिश करनी चाहिए और उसे बुराइयों से दूर करना चाहिए।
कुंती: संतान को अच्छे संस्कार दें
महाभारत में महाराज पांडु की मृत्यु के बाद कुंती ने अभावों में रहते हुए भी पांचों पांडव पुत्रों को अच्छे संस्कार दिए। धर्म-अधर्म का ज्ञान दिया। कुंती के संस्कारों की वजह से ही सभी पांडव हमेशा धर्म के मार्ग पर चले। श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त की। जो लोग धर्म के अनुसार काम करते हैं, उन्हें ईश्वर की कृपा जरूर मिलती है। माता के अच्छे संस्कार ही संतान का जीवन सफल बनाते हैं।
गांधारी: संतान की गलतियां नजरअंदाज न करें
धृतराष्ट्र की पत्नी और दुर्योधन की माता गांधारी ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी। दृष्टिहीन धृतराष्ट्र और गांधारी की आंखों पर बंधी पट्टी इस बात का प्रतीक है कि जब माता-पिता अपनी संतान के बुरे कर्मों पर ध्यान नहीं देते हैं, तब सबकुछ बर्बाद हो जाता है। इन दोनों को अपने पुत्र दुर्योधन के गलत काम दिखाई ही नहीं दिए, दुर्योधन की हर गलती को नजरअंदाज किया। जो माता-पिता संतान मोह में आंखों पर पट्टी बांध लेते हैं, बच्चों को अच्छे संस्कार नहीं देती है, उनकी संतान गलत रास्ते पर चली जाती है।
उर्मिला: पति के सही निर्णय में साथ देना चाहिए
उर्मिला सीता की बहन थीं और उनका विवाह लक्ष्मण के साथ हुआ था। श्रीराम और सीता के साथ लक्ष्मण ने भी वनवास जाने का निर्णय लिया था। उर्मिला ने अपने पति लक्ष्मण की इच्छा मान रखा और स्वयं पति के बिना 14 वर्षों तक राजमहल में पति के बिना नियम-संयम के साथ रहीं। इसी त्याग की वजह से उर्मिला को पूजनीय माना गया है। उर्मिला ने संदेश दिया है कि जीवन साथी की इच्छा का मान रखना चाहिए और उसके सही निर्णय में उसका साथ देना चाहिए।
आज का भगवद् चिन्तन
समर्पण, सहयोग और सद्भाव
समर्पण, सहयोग और सद्भाव ही जीवन में किसी संबंध को प्रेमपूर्ण बनाते हैं। संबंधों को संभालना भी जीवन की एक बहुत बड़ी कला है। आज के आधुनिक समय में हम अन्तरिक्ष में उड़ना सीख गए, समुद्र में तैरना भी सीख गए लेकिन जमीन पर रहना भूल गए। हमने इमारतें बड़ी बना ली पर दिल छोटा कर लिया। हमने मार्गों का चौड़ीकरण कर दिया पर जीवन के प्रति अपने दृष्टिकोण को अति संकीर्ण बना दिया है।
हमने साधन कई गुना बढ़ा लिए पर अपना मूल्य कम कर लिया। हमने ज्यादा बोलना सीख लिया पर प्रिय बोलना छोड़ दिया। हम विचारों से तो सम्पन्न हो गये पर आचरण से बड़े दरिद्र हो गये हैं। वर्तमान के इस भौतिक युग में प्रगति के साथ हमारी दुर्गति भी बहुत हुई है। नित्य भगवद् चिंतन और भगवदाश्रय से इस मानव जीवन को आनंदमय बनायें।प्रभु परायण बनें क्योंकि प्रभु परायणता जीवन में हमें संबंधों के प्रति हमारे कर्तव्यों का बोध भी कराती है।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | पञ्चमी – 09:10 पी एम तक | नक्षत्र | स्वाती – 01:31 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| षष्ठी | विशाखा | ||
| योग | ध्रुव – 07:04 ए एम तक | करण | कौलव – 08:10 ए एम तक |
| व्याघात | तैतिल – 09:10 पी एम तक | ||
| वार | रविवार | गर | |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | चैत्र – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 24 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | तुला | नक्षत्र पद | स्वाती – 06:55 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| सूर्य राशि | कुम्भ | स्वाती – 01:31 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | पूर्व भाद्रपद | विशाखा – 08:09 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | पूर्व भाद्रपद – 08:55 ए एम तक | विशाखा – 02:49 ए एम, मार्च 09 तक | |
| पूर्व भाद्रपद | विशाखा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 47 मिनट्स 00 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 11 मिनट्स 55 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:43 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:12 ए एम से 06:01 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:36 ए एम से 06:50 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:20 पी एम से 01:07 पी एम | विजय मुहूर्त | 02:41 पी एम से 03:28 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:34 पी एम से 06:59 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:37 पी एम से 07:50 पी एम |
| अमृत काल | 06:25 ए एम, मार्च 09 से 08:11 ए एम, मार्च 09 | निशिता मुहूर्त | 12:18 ए एम, मार्च 09 से 01:07 ए एम, मार्च 09 |
आज का विचार
चलने वाले पैरों में कितना फर्क है, एक आगे है तो एक पीछे, पर ना तो आगे वाले को अभिमान है, और ना पीछे वाले को अपमान। क्योंकि उन्हें पता होता है कि, पलभर में ये बदलने वाला है। इसी को जिन्दगी कहते है.!