पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
अच्छे-अच्छे समझदार लोगों को भी भ्रम हो जाता है। अर्जुन जैसा व्यक्ति जब भ्रम में आया तो श्रीकृष्ण को उसे गीता सुनानी पड़ी। पार्वती जी ने शिव जी से प्रश्न पूछा कि काकभुशुंडि जी ने गरुड़ जी को क्या सुनाया तो शिव जी ने कहते हैं- सुनहु परम पुनीत इतिहासा, जो सुनि सकल लोक भ्रम नासा। अब वो पवित्र इतिहास सुनो, जिससे सारे लोक के भ्रम का नाश हो जाता है।
यहां लिखा है- ‘भ्रम नासा’। भक्त में दो बातें नहीं होनी चाहिए- भ्रम और भय। लेकिन जब हम दुनियादारी में उतरते हैं तो ऐसी स्थिति आना सामान्य है। ऐसे समय ईश्वर का नाम-जप और उनके प्रति भरोसा बनाए रखिए।
आज चूंकि प्रतिस्पर्धा का युग है तो रिजेक्शन का भय बना रहता है, उसे दूर करें। कम्युनिकेशन में उत्साह बनाएं। डिजेक्शन (उदासी) को दूर रखें। तब हम भक्त होंगे। इसलिए शिव जी कह रहे हैं कि ऐसी कथा है रामकथा, जो भ्रम को दूर करती है। जब भी अवसर आए रामकथा को अवश्य सुनिए।
पञ्चाङ्ग
| तिथि | नवमी – 02:40 ए एम, फरवरी 26 तक | नक्षत्र | रोहिणी – 01:38 पी एम तक |
|---|---|---|---|
| दशमी | मृगशिरा | ||
| योग | विष्कम्भ – 01:28 ए एम, फरवरी 26 तक | करण | बालव – 03:45 पी एम तक |
| प्रीति | कौलव – 02:40 ए एम, फरवरी 26 तक | ||
| वार | बुधवार | तैतिल | |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त | बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक |
|---|---|---|---|
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु | सिद्धार्थी | |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल | चन्द्रमास | फाल्गुन – पूर्णिमान्त |
| प्रविष्टे/गते | 13 | फाल्गुन – अमान्त |
राशि तथा नक्षत्र
| चन्द्र राशि | वृषभ – 12:54 ए एम, फरवरी 26 तक | नक्षत्र पद | रोहिणी – 08:00 ए एम तक |
|---|---|---|---|
| मिथुन | रोहिणी – 01:38 पी एम तक | ||
| सूर्य राशि | कुम्भ | मृगशिरा – 07:16 पी एम तक | |
| सूर्य नक्षत्र | शतभिषा | मृगशिरा – 12:54 ए एम, फरवरी 26 तक | |
| सूर्य नक्षत्र पद | शतभिषा | मृगशिरा – 06:32 ए एम, फरवरी 26 तक | |
| मृगशिरा |
ऋतु तथा अयन
| द्रिक ऋतु | वसन्त | दिनमान | 11 घण्टे 29 मिनट्स 10 सेकण्ड्स |
|---|---|---|---|
| वैदिक ऋतु | शिशिर | रात्रिमान | 12 घण्टे 29 मिनट्स 51 सेकण्ड्स |
| द्रिक अयन | उत्तरायण | मध्याह्न | 12:45 पी एम |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय
| ब्रह्म मुहूर्त | 05:21 ए एम से 06:11 ए एम | प्रातः सन्ध्या | 05:46 ए एम से 07:01 ए एम |
|---|---|---|---|
| अभिजित मुहूर्त | 12:35 | विजय मुहूर्त | 02:40 पी एम से 03:26 पी एम |
| गोधूलि मुहूर्त | 06:27 पी एम से 06:53 पी एम | सायाह्न सन्ध्या | 06:30 पी एम से 07:45 पी एम |
| अमृत काल | 10:38 ए एम से 12:08 पी एम | निशिता मुहूर्त | 12:20 ए एम, फरवरी 26 से 01:10 ए एम, फरवरी 26 |
| 03:55 ए एम, फरवरी 26 से 05:25 ए एम, फरवरी 26 | रवि योग | 01:38 पी एम से 07:00 ए एम, फरवरी 26 | |
| सर्वार्थ सिद्धि योग | पूरे दिन |
निवास और शूल
| होमाहुति | शुक्र | दिशा शूल | उत्तर |
|---|---|---|---|
| अग्निवास | पाताल – 02:40 ए एम, फरवरी 26 तक | नक्षत्र शूल | पश्चिम – 01:38 पी एम तक |
| पृथ्वी | चन्द्र वास | दक्षिण – 12:54 ए एम, फरवरी 26 तक | |
| शिववास | गौरी के साथ – 02:40 ए एम, फरवरी 26 तक | पश्चिम – 12:54 ए एम, फरवरी 26 से पूर्ण रात्रि तक | |
| सभा में | राहु वास | दक्षिण-पश्चिम | |
| कुम्भ चक्र | दक्षिण |