पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
दांत को आंत नहीं होती और आंत को दांत नहीं होते। इस कहावत का मतलब है, अन्न के मामले में अत्यधिक सावधान रहिए। सादा भोजन आपको सीधा, सादा, भोला, समझदार बनाएगा। अब तो अन्न में भी फैशन और प्रदर्शन उतर आया है।
अपने स्वाद में चटोरापन कम करिए और तृप्ति ज्यादा उतारिए। अगर अन्न के मामले में सावधानी रखें तो बीमारियों को दूर किया जा सकता है। अन्न आपको दुबले या पतले होने का फर्क बताता है। दुबला होना यानी आदर्श मापदंडों के अनुसार, उम्र को देखते हुए, आपके कद के हिसाब से शरीर का आकार। इसको दुबला होना कहेंगे। और पतला होना यानी रोगग्रस्त होना। ये दोनों बातें अन्न से जुड़ी हैं।
अन्न तन से जुड़े तो डाइटिंग और मन से जुड़े तो लाइटिंग का फर्क है। लाइटिंग यानी व्यक्तित्व की चमक। दूषित अन्न आपके व्यक्तित्व को बहुत प्रभावित करेगा। हमने अन्न को देव माना है तो शुद्ध अन्न लेने, सीमित मात्रा में लेने और जूठा कभी नहीं छोड़ने का संकल्प लें।
श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी, कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण |
आज अष्टमी तिथि 07:23 AM तक उपरांत नवमी | नक्षत्र विशाखा | शुक्ल योग | करण बव 07:23 AM तक, बाद बालव 08:34 PM तक, बाद कौलव | आज राहु काल का समय 09:17 AM – 10:55 AM है | आज 11:52 PM तक चन्द्रमा तुला उपरांत वृश्चिक राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – श्रावण
तिथि
- शुक्ल पक्ष अष्टमी – Aug 01 04:58 AM – Aug 02 07:23 AM
- शुक्ल पक्ष नवमी – Aug 02 07:23 AM – Aug 03 09:42 AM
नक्षत्र
- विशाखा – Aug 02 03:40 AM – Aug 03 06:35 AM
आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार
इस भौतिक संसार की नश्वरता का बोध कराने के लिए ही भगवान महादेव अपने शरीर प राख धारण करते हैं। इस संसार में जो कुछ भी आज है, वह कल के लिए मात्र और मात्र एक राख के ढेर से ज्यादा कुछ भी नहीं है। हमारे द्वारा अर्जित सभी भौतिक संपत्तियां और हमारा स्वयं का शरीर भी एक मुट्ठी राख से ज्यादा कुछ नहीं है। जीवन का अंतिम और अमिट सत्य राख ही तो है। राख ही प्रत्येक वस्तु का सार है और इसी सार तत्व को भगवान शिव अपने शरीर पर धारण करते हैं।
भगवान शिव मानव मात्र को संदेश देते हैं, कि किसी भी वस्तु का अभिमान मत करो क्योंकि प्रत्येक वस्तु एक दिन मेरे समान ही राख बन जाने वाली है। आपका बल, आपका वैभव, आपकी अकूत सम्पदा सब यहीं रह जाने हैं। प्रभु कृपा से जो भी आपको प्राप्त हुआ है उसे परमार्थ में, परोपकार में, सद्कार्यों में और सेवा कार्यों में लगाने के साथ-साथ मिल बाँट कर खाना सीखो, यही मनुष्यता है, यही दैवत्व है और यही जीवन का परम सत्य व जीवन की परम सार्थकता भी है।