पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है
माघ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, माघ | आज है शिशिर ऋतू , माघ गुप्त नवरात्रि और सोमवार व्रत|
आज प्रतिपदा तिथि 02:14 AM तक उपरांत द्वितीया | नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 11:52 AM तक उपरांत श्रवण | वज्र योग 08:45 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग | करण किस्तुघन 01:51 PM तक, बाद बव 02:14 AM तक, बाद बालव | आज राहु काल का समय 08:35 AM – 09:55 AM है | आज चन्द्रमा मकर राशि पर संचार करेगा |
नींद भी निराली होती है। कम आए तो बीमारी, ज्यादा आए तो भी बीमारी। नींद का संबंध सपनों से भी है। नींद के सपने बीमारी के लक्षण हैं। जागते हुए सपने देखना संकल्प का प्रतीक है। वैज्ञानिक कहते हैं जब हम सपने देखते हैं तो हमारी आंखों की पुतलियां इधर-उधर घूमती हैं। इसे आरईएम यानी रैपिड आई मूवमेंट कहते हैं।
कुछ वैज्ञानिक ऐसा भी बताते हैं कि पुतलियां यदि भीतर ही भीतर घूमें तो सपने आते हैं या सपनों में ऐसा होता है। अब चूंकि अधपकी नींद सपनों की संतानें हैं और नई-नई बीमारियों को जन्म देने वाली हैं, इसलिए दिन में एक प्रयोग किया जा सकता है। कमर सीधी रखें, आंखें बंद करें, अपनी पुतलियों को भीतर ही भीतर अपने मस्तिष्क में देखें- जैसे छतरी खोलकर भीतर से झांका जा रहा है। उसे सहस्रार चक्र कहते हैं, जहां देखना है। अगर दिन में दो-तीन बार इसका अभ्यास करें तो पुतलियां घूमेंगी नहीं, सपने नहीं आएंगे। या सपनों में पुतलियां नहीं घूमेंगी तो सपने अशांति का कारण नहीं बनेंगे।