आज का पंचांग : मनुष्य होने का दुरुपयोग न करें

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

वैसे तो ढेर हमेशा कचरे का होता है, लेकिन जरा अपने आसपास देखिए, तो इंसानों का भी ढेर नजर आएगा। समूचा इंसान ढूंढना मुश्किल है। पूरा इंसान वो होता है, जो अपने सत्कर्मों से अपनी छवि बनाता है। प्रभु श्रीराम अपने छोटे भाई भरत को मनुष्य के शरीर का महत्व समझाते हुए एक अनूठी बात कहते हैं। और उनका कहना है, ‘अगर मनुष्य का शरीर मिला है, तो इसे केवल विषय-भोग में न लगाएं’। विषय-भोग मतलब सेक्शुअल टेंडेंसी।

हमारी काम ऊर्जा हमें वासनाओं में पटकती है। इसी काम ऊर्जा को हम राम ऊर्जा में भी बदल सकते हैं। ‘एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई। नर तनु पाइ बिषयं मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।’ ‘हे भाई, इस शरीर के प्राप्त होने का फल विषय भोग नहीं है। इस जगत के भोगों की तो बात ही क्या।

स्वर्ग का भोग भी बहुत थोड़ा है। और अंत में दुख देने वाला है।’ इसलिए हमारे भीतर जो ऊर्जा है, उसे हम अपनी नेतृत्व क्षमता की ओर मोड़ें। मनुष्य के भीतर दो विशेषताएं हैं- एक उसके सोचने की क्षमता और दूसरा आत्मा तक जाने की ताकत। यही बात मनुष्यों को पशु से अलग करती है। मनुष्य होना अद्भुत उपलब्धि है। इसका दुरुपयोग न करें।

पञ्चाङ्ग
तिथिदशमी – पूर्ण रात्रि तकनक्षत्रपूर्वाषाढा – 03:03 ए एम, मार्च 14 तक
योगव्यतीपात – 10:32 ए एम तकउत्तराषाढा
वरीयान्करणवणिज – 07:23 पी एम तक
वारशुक्रवारविष्टि – पूर्ण रात्रि तक
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2082 कालयुक्तबृहस्पति संवत्सरकालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक
शक सम्वत1947 विश्वावसुसिद्धार्थी
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते29फाल्गुन – अमान्त
राजासूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिशनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीसूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिचन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिबुध – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिसूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिमंगल – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिबुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिशनि – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिधनुनक्षत्र पदपूर्वाषाढा – 07:21 ए एम तक
सूर्य राशिकुम्भपूर्वाषाढा – 01:57 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रपूर्व भाद्रपदपूर्वाषाढा – 08:31 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदपूर्व भाद्रपदपूर्वाषाढा – 03:03 ए एम, मार्च 14 तक
  उत्तराषाढा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान11 घण्टे 55 मिनट्स 15 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान12 घण्टे 03 मिनट्स 38 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:42 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:07 ए एम से 05:56 ए एमप्रातः सन्ध्या05:32 ए एम से 06:44 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:18 पी एम से 01:06 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:37 पी एम से 07:01 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:39 पी एम से 07:52 पी एम
अमृत काल09:47 पी एम से 11:32 पी एमनिशिता मुहूर्त12:17 ए एम, मार्च 14 से 01:05 ए एम, मार्च 14

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