आज का पंचांग : सुख का द्वार

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।

मोबाइल की स्क्रीन से चिपके रहना धीरे-धीरे महामारी बन रही है। इसका इलाज अभी से ढूंढ लिया जाए। दो काम आप भी कर सकते हैं और उन्हें भी सिखा सकते हैं, जो इसका शिकार बन चुके हैं या बन रहे हैं। एक है, किताबें पढ़ना और दूसरा है, कागज पर लिखना।

इससे आप बहुत अच्छे संचारक बन जाते हैं। यही नहीं, जो बात आप दूसरों को कहना चाहते हैं, वो अच्छे से कह सकेंगे। और स्वयं को भी जो समझाना चाहते हैं, समझा सकेंगे। इन दोनों कामों से शांति भी मिलती है। जब भी कोई किताब पढ़ें, कोशिश करिए कि वो आपकी खरीदी हुई हो और पढ़ते समझ अच्छे लगने वाले कुछ वाक्यों को अंडरलाइन जरूर करें।

शब्दों की पुनरावृत्ति भी एक तरह का व्यायाम है। गीता और रामचरित मानस में और अन्य शास्त्रों में भी कई पंक्तियां हूबहू दोहराई गई हैं। कोशिश करिए, छोटे शब्द चुनें, आसान वाक्यों को पुस्तकों से ले लें और कागज पर अपने विचार लिखे। इस अभ्यास के लिए एक तय समय रखें। इससे आप डिजिटल महामारी से बच सकेंगे।

आश्विन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |

आज चतुर्दशी तिथि 12:17 AM तक उपरांत अमावस्या | नक्षत्र मघा 08:05 AM तक उपरांत पूर्व फाल्गुनी | साध्य योग 08:06 PM तक, उसके बाद शुभ योग | करण विष्टि 11:54 AM तक, बाद शकुनि 12:17 AM तक, बाद चतुष्पद | आज राहु काल का समय 09:19 AM – 10:49 AM है | आज चन्द्रमा सिंह राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आश्विन
  4. अमांत – भाद्रपद

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष चतुर्दशी   – Sep 19 11:37 PM – Sep 21 12:17 AM
  2. कृष्ण पक्ष अमावस्या   – Sep 21 12:17 AM – Sep 22 01:23 AM

नक्षत्र

  1. मघा – Sep 19 07:05 AM – Sep 20 08:05 AM
  2. पूर्व फाल्गुनी – Sep 20 08:05 AM – Sep 21 09:32 AM

आज का विचार

अपनों के लिए चिंता हृदय में होती है, शब्दों में नहीं। और अपनों के लिए गुस्सा शब्दों में होता है, हृदय में नहीं, बस यही एक अटूट प्रेम की परिभाषा है.!

आज का भगवद् चिन्तन
सुख का द्वार

कुएँ की विपरीत दिशा में गति कभी भी आपकी प्यास को नहीं बुझा सकती है और धर्म के प्रतिकूल आचरण कभी भी आपको सुख व शांति प्रदान नहीं कर सकता है। जीवन में सुख की चाह तो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है पर वह प्रयास सदैव विपरीत दिशा में करता है। यदि आप सच में सुखी होना चाहते हैं तो फिर उन रास्तों का भी त्याग करें जिनसे जीवन में दुःख आता है। आपकी सुख की चाह तो ठीक है पर राह ठीक नहीं हैं। सुख के लिए केवल निरंतर प्रयास ही पर्याप्त नहीं है अपितु उचित दिशा में प्रयास होना भी आवश्यक है।

दुःख भगवान के द्वारा दिया गया कोई दंड नहीं है, यह तो असत्य का संग देने का प्रतिफल है। आज का आदमी बड़ी दुविधा में जीवन जी रहा है। वह कभी तो राम का संग कर लेता है पर अवसर मिलते ही रावण का संग करने से भी नहीं चूकता है। राम अर्थात् सद्गुण, सदाचार एवं रावण अर्थात् दुर्गुण, दुराचार का संग है। जैसा चुनाव करोगे वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा। असत्य के मार्ग का परित्याग करके राममय जीवन जियो, बस यही सीख ही मानव जीवन में सुख-शांति व मंगल की मूल है।

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