आज का पंचांग : लोभ पाप का मूल

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आश्विन कृष्ण पक्ष दशमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, भाद्रपद |

आज दशमी तिथि 12:22 AM तक उपरांत एकादशी | नक्षत्र आद्रा 06:46 AM तक उपरांत पुनर्वसु | वरीयान योग 12:33 AM तक, उसके बाद परिघ योग | करण वणिज 12:53 PM तक, बाद विष्टि 12:22 AM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 03:23 PM – 04:54 PM है | आज 12:28 AM तक चन्द्रमा मिथुन उपरांत कर्क राशि पर संचार करेगा |

  1. विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
  2. शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
  3. पूर्णिमांत – आश्विन
  4. अमांत – भाद्रपद

तिथि

  1. कृष्ण पक्ष दशमी   – Sep 16 01:31 AM – Sep 17 12:22 AM
  2. कृष्ण पक्ष एकादशी   – Sep 17 12:22 AM – Sep 17 11:39 PM

नक्षत्र

  1. आद्रा – Sep 15 07:31 AM – Sep 16 06:46 AM
  2. पुनर्वसु – Sep 16 06:46 AM – Sep 17 06:26 AM

आज का भगवद् चिन्तन
लोभ पाप का मूल

अधिक लोभ करना अधिक पाप वृत्तियों को जन्म देने जैसा ही है। लोभ के वशीभूत होकर ही मनुष्य द्वारा अनेक तरह के पाप एवं न करने जैसे कर्मों को किया जाता है। अधिक लोभ ही जीवन में पाप कर्मों का कारण भी बनता है। कामी मनुष्य के जीवन में निष्कामता आना सम्भव है, क्रोधी मनुष्य के जीवन में भी एक दिन परम शांति का प्रवेश संभव है, लेकिन लोभी मनुष्य के जीवन में प्रसन्नता की प्राप्ति अति कठिन है।

जिस व्यक्ति की लोभ और मोह वृत्तियाँ असीम हैं, उस व्यक्ति को कहीं भी शांति नहीं मिल सकती। बहुत कुछ पाने की खुशी नहीं अपितु थोड़ा कुछ खोने का दुःख ही लोभ कहलाता है। अपनी उपलब्धियों पर प्रसन्न रहो और किसी के साथ अकारण अपनी तुलना करके अपने जीवन के सुख व प्रसन्नता को कम मत करो। दुनिया में बहुत लोगों के पास उतना भी नहीं, जितना आपके पास है। अधिक लोभ से बचो, यह आपको अनेक पापों से बचा लेगा।

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