पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
कहते हैं मृत्यु का अंधेरा हो तो जीवन की बिजली जोर से चमकती है। इसे यूं समझें कि जब हम दबाव और थकान में हों तो मान लेते हैं कि हम बाहर से नहीं, भीतर से भी दबाव और थकान में हैं। ऐसा होता नहीं है। यदि हमारा शरीर थका हुआ हो, दबाव महसूस करे, तो उसी समय हमारे भीतर कहीं बारीकी से एक स्फूर्ति, एक विश्राम की वृत्ति भी अंगड़ाई ले रही होती है।
हम उसे पकड़ नहीं पाते। यदि पकड़ लें तो बाहर की स्थितियां नियंत्रित हो जाएंगी। देश में कई प्रतिशत लोग बर्नआउट यानी थकान के शिकार हैं। यह थकान कहां से आती है? घर से। जहां आप काम करते हैं वहां के माहौल से।
और इन दोनों को प्रभावित करती है निजी सोच कि स्थितियों से निपटने का आपका तरीका कैसा है। लेकिन आपके भीतर एक वृत्ति है, जो बहुत स्फूर्त है, पॉजिटिव है। अगर आप कार्यस्थल पर परेशान हों, परिवार में दिक्कत आए, तो बाहर के लोगों पर मत टिकिए। भीतर उतरिए। फिर देखिए, आपको कोई परेशान नहीं कर सकता
आज श्रावण शुक्ल पक्ष अष्टमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, दुर्गाष्टमी व्रत
आज अष्टमी | नक्षत्र स्वाति 03:40 AM तक उपरांत विशाखा | शुभ योग 05:30 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग | करण विष्टि 06:11 PM तक, बाद बव | आज राहु काल का समय 10:55 AM – 12:33 PM है आज चन्द्रमा तुला राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, कालयुक्त
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – श्रावण
तिथि
- शुक्ल पक्ष अष्टमी [ वृद्धि तिथि ] – Aug 01 04:58 AM – Aug 02 07:23 AM
नक्षत्र
- स्वाति – Aug 01 12:41 AM – Aug 02 03:40 AM
- विशाखा – Aug 02 03:40 AM – Aug 03 06:35 AM
आज का भगवद् चिन्तन
शिव तत्व विचार
वर्तमान समय का एक बहुत बड़ा दुर्भाग्य यह है कि बहुत सारे लोगों द्वारा भगवान शिव के नाम पर भाँग, गांजा जैसे अनेक प्रकार का नशा किया जाता है और भोले बाबा का प्रसाद कहकर दूसरों को भी कराया जाता है। महादेव तो आशुतोष भोलेनाथ हैं इसलिए भांग के पत्ते, जिन्हें पशु तक भी नहीं खाते और धतूरे का वह फल, जिसे कोई पक्षी तक चोंच नहीं मारते उनको अर्पित करने वाले का भी कल्याण कर देते हैं।
भगवान भोलेनाथ के प्रसाद के नाम से प्रचलित इस नशा की कुप्रथा का सभी शिव भक्तों द्वारा पुरजोर विरोध किया जाना चाहिए। नशा करने वाले का कभी भी कल्याण संभव ही नहीं, अब वह भले ही भोले बाबा अथवा किसी अन्य देवता के प्रसाद के नाम से ही क्यों न किया जाए। यदि तनिक भी कल्याण की चिंता हो तो शिव के नाम पर नशा नहीं अपितु शिव के नाम का नशा करो। अंत में सार केवल इतना कि भक्ति का नशा करो, नशे की भक्ति कदापि नहीं।
आज का विचार
भ्रम हमेशा रिश्तों को बिखेरता है और प्रेम से अजनबी भी बंध जाते है। किसी के लिए समर्पण करना मुश्किल नहीं है, मुश्किल है उस व्यक्ति को ढूंढना जो आप के समर्पण की कद्र करे.