आज का पंचांग : अपने काम से प्रेम करने पर कर्म बोझ नहीं लगेगा

पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है

पंडित उदय शंकर भट्ट

आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है

आजकल ट्रांसफरेबल स्किल्स का जमाना है। इसे सीधी भाषा में कहें तो किसी एक काम में दूसरे काम के कौशल को उतारना। जैसे इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, समय प्रबंधन, डेटा विश्लेषण। एक ही काम में इन सबको जोड़ना पड़ेगा। यह प्रबंधन के ढंग हैं।

अब इसी में अगर अध्यात्म का सहारा लें तो ऋषि-मुनियों ने शास्त्रों में एक स्किल और बताई है, और वो है प्रेम। ये हर जगह काम आएगी। काकभुशुंडि जी ने जब गरुड़ जी को कथा सुनानी शुरू की तो तुलसीदास जी ने लिखा- प्रथमहिं अति अनुराग भवानी, रामचरित सर कहेसि बखानी।

भवानी, पहले तो उन्होंने बड़े ही प्रेम से रामचरितमानस सरोवर का रूपक समझाकर कहा और फिर आगे कथा बढ़ाई। यह बात शिव जी पार्वती जी को कह रहे हैं। कथा में बोलते समय उन्होंने प्रेम उतारा।

वक्तव्य में प्रेम हो तो मिठास, अपनापन, वाणी की गरिमा अपने आप आ जाती है। जो भी काम करें, प्रेम से करें और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अपने काम से प्रेम करिए तो आपका कर्म आपको बोझ नहीं लगेगा।

पञ्चाङ्ग
तिथिएकादशी – 09:16 ए एम तकनक्षत्रश्रवण – 05:56 ए एम, मार्च 16 तक
द्वादशीधनिष्ठा
योगपरिघ – 10:25 ए एम तककरणबालव – 09:16 ए एम तक
शिवकौलव – 09:33 पी एम तक
वाररविवारतैतिल
पक्षकृष्ण पक्ष  
चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर विक्रम सम्वत 2082 का मन्त्री मण्डल
विक्रम सम्वत2082 कालयुक्तबृहस्पति संवत्सरकालयुक्त – 03:07 पी एम, अप्रैल 25, 2025 तक
शक सम्वत1947 विश्वावसुसिद्धार्थी
गुजराती सम्वत2082 पिङ्गलचन्द्रमासचैत्र – पूर्णिमान्त
प्रविष्टे/गते1फाल्गुन – अमान्त
राजासूर्य – शासन व्यवस्था के स्वामीसेनाधिपतिशनि – रक्षा मन्त्री एवं सेनानायक
मन्त्रीसूर्य – नीतियों एवं प्रशासन के स्वामीधान्याधिपतिचन्द्र – रबी की फसलों के स्वामी
सस्याधिपतिबुध – खरीफ की फसलों के स्वामीमेघाधिपतिसूर्य – मेघ एवं वर्षा के स्वामी
धनाधिपतिमंगल – धन एवं कोष के स्वामीनीरसाधिपतिबुध – धातु, खनिज आदि के स्वामी
रसाधिपतिशुक्र – रस एवं द्रव पदार्थों के स्वामीफलाधिपतिशनि – फल-पुष्पादि के स्वामी
राशि तथा नक्षत्र
चन्द्र राशिमकरनक्षत्र पदश्रवण – 11:09 ए एम तक
सूर्य राशिमीनश्रवण – 05:27 पी एम तक
सूर्य नक्षत्रपूर्व भाद्रपदश्रवण – 11:43 पी एम तक
सूर्य नक्षत्र पदपूर्व भाद्रपदश्रवण – 05:56 ए एम, मार्च 16 तक
  धनिष्ठा
ऋतु तथा अयन
द्रिक ऋतुवसन्तदिनमान11 घण्टे 58 मिनट्स 33 सेकण्ड्स
वैदिक ऋतुशिशिररात्रिमान12 घण्टे 00 मिनट्स 19 सेकण्ड्स
द्रिक अयनउत्तरायणमध्याह्न12:41 पी एम
वैदिक अयनउत्तरायण  
शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त05:06 ए एम से 05:54 ए एमप्रातः सन्ध्या05:30 ए एम से 06:42 ए एम
अभिजित मुहूर्त12:17 पी एम से 01:05 पी एमविजय मुहूर्त02:41 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त06:38 पी एम से 07:02 पी एमसायाह्न सन्ध्या06:41 पी एम से 07:53 पी एम
अमृत काल07:03 पी एम से 08:43 पी एमनिशिता मुहूर्त12:17 ए एम, मार्च 16 से 01:05 ए एम, मार्च 16
द्विपुष्कर योग05:56 ए एम, मार्च 16 से 06:41 ए एम, मार्च 16 

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