पंचांग का अति प्राचीन काल से ही बहुत महत्त्व माना गया है | ज्योतिष शास्त्रों में भी पंचांग को बहुत महत्त्व दिया गया है और पंचाग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना गया है
पंडित उदय शंकर भट्ट
आज आपका दिन मंगलमयी हो, यही मंगलकामना है। ‘हिमशिखर खबर’ हर रोज की तरह आज भी आपके लिए पंचांग प्रस्तुत कर रहा है।
श्रावण शुक्ल पक्ष सप्तमी, सिद्धार्थ संवत्सर विक्रम संवत 2082, शक संवत विश्वावसु 1947, श्रावण | आज है तुलसीदास जयंती|
आज सप्तमी तिथि 04:58 AM तक उपरांत अष्टमी | नक्षत्र चित्रा 12:41 AM तक उपरांत स्वाति | साध्य योग 04:31 AM तक, उसके बाद शुभ योग | करण गर 03:48 PM तक, बाद वणिज 04:58 AM तक, बाद विष्टि | आज राहु काल का समय 02:11 PM – 03:49 PM है | आज 11:15 AM तक चन्द्रमा कन्या उपरांत तुला राशि पर संचार करेगा
- विक्रम संवत – 2082, सिद्धार्थ
- शक सम्वत – 1947, विश्वावसु
- पूर्णिमांत – श्रावण
- अमांत – श्रावण
तिथि
- शुक्ल पक्ष सप्तमी – Jul 31 02:41 AM – Aug 01 04:58 AM
- शुक्ल पक्ष अष्टमी – Aug 01 04:58 AM – Aug 02 07:23 AM
नक्षत्र
- चित्रा – Jul 30 09:53 PM – Aug 01 12:41 AM
- स्वाति – Aug 01 12:41 AM – Aug 02 03:40 AM
आज का उपाय : आज विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।
स्वार्थी होना संसार का मूल लक्षण है। हर मनुष्य कहीं ना कहीं स्वार्थी है और होना भी चाहिए। स्वार्थ में कोई पाप नहीं है, लेकिन निजी हित साधने के लिए दूसरों को नुकसान पहुंचाना- यहीं से स्वार्थ पाप बन जाता है। ऐसा कहते हैं कि कौन, किसके काम आता है? और बिना स्वार्थ के तो आजकल कोई किसी से सम्बंध रखता ही नहीं है।
श्रीराम के लिए अयोध्यावासियों ने कहा था- ‘हेतु रहित जग जुग उपकारी, तुम्ह तुम्हार सेवक असुरारी।’ जगत में बिना हेतु के यानी निःस्वार्थ उपकार करने वाले तो दो ही हैं- एक आप, दूसरे आपके सेवक। ये जो दूसरे सेवक का नाम लिया, इनमें सबसे ऊपर आते हैं हनुमानजी।
यानी रामजी तो हैं ही दूसरों का भला करने वाले, पर जो रामजी के सेवक हैं वो भी भला करते हैं। हम सब भी कहीं ना कहीं श्रीराम के सेवक हैं। तो क्यों ना हम हनुमानजी से सीखें कि हम दूसरों के काम आएं। जब हम दूसरों के दुःख मिटाते हैं तो ऊपर वाला अतिरिक्त सुख हमारी झोली में डाल देता है।